
नयी दिल्ली: लोकसभा में राजनीतिक टकराव उस समय तेज हो गया जब भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस नेता और विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ विशेष प्रस्ताव पेश किया। दुबे ने राहुल गांधी पर देश को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए उनकी संसदीय सदस्यता रद्द करने और उन पर आजीवन चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाने की मांग की। उन्होंने दावा किया कि गांधी के बयान ऐसे तत्वों के नैरेटिव से मेल खाते हैं जो भारत के हितों को नुकसान पहुंचाना चाहते हैं।
यह प्रस्ताव राहुल गांधी के उस भाषण के बाद लाया गया, जिसमें उन्होंने केंद्र सरकार पर राष्ट्रीय हितों से समझौता करने का आरोप लगाया था। गांधी ने कहा था कि दुनिया एक बड़े वैश्विक संकट से गुजर रही है, महाशक्ति का युग समाप्ति की ओर है और भू-राजनीतिक संघर्ष तेज हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ऊर्जा और वित्तीय प्रणालियों का दुरुपयोग हथियार के रूप में किया जा रहा है और भारत की ऊर्जा सुरक्षा बाहरी दबावों से प्रभावित हो रही है।
राहुल गांधी ने यह भी कहा कि जब किसी देश से तेल खरीदने पर रोक लगती है तो इसका सीधा असर भारत की ऊर्जा स्वतंत्रता पर पड़ता है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि क्या यह राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं है। इसके अलावा, उन्होंने शुल्क दरों में वृद्धि और अमेरिकी आयात में संभावित बढ़ोतरी पर भी चिंता जताई। उनके अनुसार औसत शुल्क 3 प्रतिशत से बढ़कर 18 प्रतिशत हो गया है और अमेरिकी आयात 46 अरब डॉलर से बढ़कर 146 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।
भाजपा ने इन बयानों को भ्रामक और राष्ट्रहित के खिलाफ बताया है, जबकि कांग्रेस ने इसे विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश करार दिया है। लोकसभा में यह मुद्दा अब बड़े राजनीतिक विवाद का रूप लेता दिख रहा है।






