Home राष्ट्रीय अग्निपथ योजना पर बड़ा सवाल: कितने अग्निवीर बनेंगे स्थायी जवान?

अग्निपथ योजना पर बड़ा सवाल: कितने अग्निवीर बनेंगे स्थायी जवान?

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Big question on Agnipath scheme: How many Agniveers will become permanent soldiers?

नयी दिल्ली: संसद के बजट सत्र में अग्निपथ योजना को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की अप्रकाशित पुस्तक का हवाला देकर उठाए गए सवालों के बाद सदन में गतिरोध की स्थिति बन गई। हालात ऐसे रहे कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव बिना चर्चा के पारित हो गया और बजट पर बहस भी बाधित रही।

राजनीतिक बहस से अलग, अग्निपथ योजना की वास्तविक परीक्षा अब सामने है। इस वर्ष के अंत में नौसेना के पहले बैच के करीब 2600 अग्निवीर चार साल की सेवा पूरी कर बाहर आएंगे। इसके बाद अगले वर्ष की शुरुआत में थलसेना और वायुसेना के पहले बैच की सेवा अवधि भी पूरी होगी। मौजूदा प्रावधानों के अनुसार केवल 25 प्रतिशत अग्निवीरों को स्थायी नियुक्ति मिलेगी, जबकि शेष 75 प्रतिशत को सेवा से बाहर होना होगा।

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सबसे बड़ा सवाल यही है कि बाहर होने वाले युवाओं के लिए रोजगार के क्या ठोस इंतजाम हैं। केंद्र सरकार का दावा है कि CAPF और विभिन्न राज्य पुलिस बलों में अग्निवीरों के लिए आरक्षण या प्राथमिकता का प्रावधान किया गया है। हालांकि, शुरुआत से ही यह मांग उठती रही है कि स्थायी किए जाने वाले अग्निवीरों का प्रतिशत 25 से बढ़ाया जाए। सेना के भीतर से भी 40 से 50 प्रतिशत, और कुछ मामलों में इससे अधिक रिटेंशन की सिफारिश की चर्चा रही है।

सरकार ने फिलहाल चार साल की सेवा अवधि बढ़ाने के संकेत नहीं दिए हैं, लेकिन रिटेंशन रेट में बदलाव की संभावना पर निगाहें टिकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पहले बैच के बाद नियमों में बदलाव होता है, तो कानूनी चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं। ऐसे में अग्निपथ योजना की सफलता का असली पैमाना अब पहले बैच के भविष्य से तय होगा।

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