नयी दिल्ली: उपभोक्ता अधिकार और सेवा में कोताही के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है, जो सैलून से जुड़े विवादों में मिसाल बन सकता है। मामला 2018 का है, जब दिल्ली स्थित एक फाइव स्टार होटल के सैलून में एक मॉडल अपने निर्देश के अनुसार बाल कटवाने गई थी। आरोप था कि हेयर स्टाइलिस्ट ने उसके बाल निर्देश से अधिक छोटे काट दिए, जिससे उसे मानसिक आघात हुआ और मॉडलिंग करियर के अवसरों का नुकसान हुआ।
राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने शुरू में मॉडल को 2 करोड़ रुपये मुआवजे का आदेश दिया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने मामला दोबारा विचार के लिए आयोग भेजा और इस दौरान आयोग ने 2023 में पुनः 2 करोड़ का मुआवजा बरकरार रखा। इसके बाद होटल कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट में इस आदेश को चुनौती दी।
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए मुआवजे की राशि घटाकर 25 लाख रुपये कर दी। जस्टिस राजेश बिंदल की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि सेवा में कोताही साबित होने पर भी उपभोक्ता विवादों में क्षतिपूर्ति केवल ठोस और भरोसेमंद साक्ष्यों के आधार पर दी जानी चाहिए, न कि केवल शिकायतकर्ता की इच्छा, अनुमान या मनमानी के आधार पर। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब दावा करोड़ों रुपये का हो, तो हर्जाने के लिए प्रमाणिक दस्तावेज़ और सबूत प्रस्तुत करना अनिवार्य है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि यह मामला ऐसा नहीं था, जिसमें आयोग ने नियमों और वास्तविक साक्ष्यों के आधार पर नहीं, बल्कि अनुमान और दावे के आधार पर मुआवजा तय किया हो। अदालत ने यह रेखांकित किया कि सेवा प्रदाता की कोताही सिद्ध होने पर भी मुआवजा वास्तविक नुकसान और सबूतों के अनुरूप होना चाहिए।
इस फैसले का संदेश स्पष्ट है: उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा महत्वपूर्ण है, लेकिन लाखों रुपये के मुआवजे के लिए ठोस साक्ष्य का होना अनिवार्य है। सैलून, हेयरस्टाइल और सौंदर्य सेवाओं में भी सेवा में त्रुटि के दावे केवल प्रमाणिक आधार पर ही मान्य होंगे।
मुख्य बिंदु:
यह फैसला उपभोक्ता सेवा और मुआवजे के मामलों में महत्वपूर्ण मिसाल है।
मॉडल को सैलून में गलत हेयरकट के लिए शुरू में 2 करोड़ रुपये मुआवजा मिला था।
सुप्रीम कोर्ट ने मुआवजा घटाकर 25 लाख रुपये कर दिया।
अदालत ने कहा कि क्षतिपूर्ति ठोस सबूतों पर ही दी जाएगी, अनुमान या शिकायतकर्ता की इच्छा के आधार पर नहीं।







