
नयी दिल्ली: योग गुरु बाबा रामदेव ने सोशल मीडिया पर अपनी छवि को कथित रूप से नुकसान पहुंचाने और निजता के अधिकारों के उल्लंघन को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उनकी याचिका में उन पोस्ट, तस्वीरों और वीडियो को हटाने की मांग की गई है, जिन्हें उन्होंने अपमानजनक, भ्रामक और उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने वाला बताया है। इस मामले ने सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत अधिकारों के बीच संतुलन को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।
सुनवाई के दौरान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X की ओर से कहा गया कि जिन 16 लिंक की शिकायत की गई थी, उनमें से अधिकांश पहले ही हटा दिए गए हैं। प्लेटफॉर्म ने यह भी तर्क दिया कि पैरोडी, व्यंग्य और राजनीतिक टिप्पणी जैसे कंटेंट को पूरी तरह प्रतिबंधित करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन हो सकता है। वहीं, Meta की ओर से पेश वकील ने कहा कि वे आपत्तिजनक सामग्री हटाने के लिए तैयार हैं, लेकिन किसी व्यक्ति से जुड़े समाचार या तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पर रोक नहीं लगाई जा सकती।
रामदेव के वकील ने अदालत में कहा कि कुछ पोस्ट में उन्हें एलोपैथिक इलाज लेते हुए दिखाया गया है या ऐसे संदर्भों में प्रस्तुत किया गया है, जो उनकी सार्वजनिक छवि और विचारधारा के विपरीत हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की सामग्री न केवल अपमानजनक है, बल्कि उनकी व्यक्तिगत और पेशेवर प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचा रही है।
मामले की सुनवाई कर रहीं जस्टिस ज्योति सिंह ने रामदेव से स्पष्ट रूप से उन पोस्ट और लिंक की सूची प्रस्तुत करने को कहा है, जिन्हें वे हटवाना चाहते हैं। अदालत ने सोशल मीडिया कंपनियों को भी अपनी आपत्तियां दर्ज कराने का निर्देश दिया है।
यह मामला आने वाले समय में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर व्यक्तियों के अधिकार, निजता की सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन तय करने में महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।






