आंध्र प्रदेश: आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले में मिलावटी दूध से जुड़ी एक दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को दहला दिया है। सुबह की चाय और बच्चों के लिए लाया गया दूध कई परिवारों के लिए मौत का कारण बन गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, जहरीला दूध पीने से अब तक 12 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य लोग गंभीर हालत में अस्पतालों में भर्ती हैं। इस घटना ने खाद्य सुरक्षा और मिलावटखोरी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इस रहस्यमयी बीमारी के मामले सबसे पहले 22 फरवरी को सामने आए थे। उस समय कई बुजुर्ग लोगों को पेशाब न आना, उल्टी, पेट दर्द और शरीर में सूजन जैसी गंभीर समस्याओं के साथ अस्पतालों में भर्ती कराया गया था। जांच में पता चला कि प्रभावित लोग लालाचेरुवु इलाके के चौदेश्वरनगर और स्वरूपनगर के निवासी हैं।
डॉक्टरों द्वारा की गई नैदानिक जांच में मरीजों के रक्त में यूरिया और सीरम क्रिएटिनिन का स्तर काफी बढ़ा हुआ पाया गया, जो किसी विषैले पदार्थ के संपर्क में आने का संकेत देता है। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि कोरुकोंडा मंडल के नरसपुरम गांव स्थित वरलक्ष्मी मिल्क डेरी से सप्लाई किया जाने वाला दूध इस घटना का संभावित स्रोत हो सकता है। बताया जा रहा है कि इस डेरी से करीब 106 परिवारों को दूध की आपूर्ति की जाती थी।
घटना सामने आते ही प्रशासन ने तुरंत दूध की आपूर्ति बंद कर दी और डेरी को सील कर दिया गया। अधिकारियों ने डेरी से दूध के नमूने लेकर जांच के लिए भेज दिए हैं। पुलिस ने संदिग्ध दूध विक्रेता अड्डाला गणेश्वरराव (33) को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।
इस बीच इलाके में आपातकालीन चिकित्सा शिविर लगाए गए हैं और डॉक्टरों व विशेषज्ञों की टीम प्रभावित लोगों का इलाज कर रही है। प्रशासन का कहना है कि मामले की गहन जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।







