नयी दिल्ली: ईरान में जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। वहां से लौटे एक भारतीय नागरिक ने बताया कि पिछले दो सप्ताह में स्थिति बेहद डरावनी हो गई थी। सड़कों पर प्रदर्शनकारी अचानक गाड़ियों के सामने आ जाते थे, रास्ते बंद कर देते थे और लोगों को घंटों फंसे रहना पड़ता था। हालात पर काबू पाने के लिए ईरान सरकार ने इंटरनेट सेवा पूरी तरह ठप कर दी थी, जिसके कारण विदेशी नागरिक अपने परिवार और दूतावास से संपर्क तक नहीं कर पा रहे थे।
भारत लौटे शख्स ने बताया कि वह लगभग एक महीने से ईरान में थे, लेकिन शुरुआती दिनों में माहौल सामान्य था। असली परेशानी तब शुरू हुई जब बड़े शहरों में प्रदर्शन तेज हो गए। बाहर निकलना मुश्किल हो गया था। उन्होंने कहा कि कई बार टैक्सी या निजी गाड़ी से जाते समय प्रदर्शनकारी वाहन रोक लेते थे और नारेबाजी करने लगते थे। इंटरनेट बंद होने के कारण न तो ऑनलाइन टैक्सी बुक हो पा रही थी और न ही व्हाट्सऐप या कॉल के जरिए किसी से मदद मिल रही थी।
उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय दूतावास से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन संचार सेवाएं बंद होने के कारण कोई रास्ता नहीं निकल सका। बाद में जब हालात थोड़े सुधरे तो वे किसी तरह एयरपोर्ट पहुंचे और भारत लौट पाए। हालांकि उनका कहना है कि अब धीरे-धीरे स्थिति सामान्य होती दिख रही है, लेकिन लोगों के मन में डर अब भी बना हुआ है।
इससे पहले उत्तर प्रदेश के बिजनौर निवासी मोहम्मद जवाद ने भी बताया था कि उनकी मौसी जियारत के लिए ईरान गई थीं और वहां फंस गई थीं। भारत सरकार की पहल पर उन्हें सुरक्षित स्वदेश लाया गया। विदेश मंत्रालय लगातार ईरान में मौजूद भारतीयों से संपर्क बनाए हुए है।
उधर, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी तनाव बढ़ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है और प्रदर्शनकारियों पर हिंसा रोकने की मांग की है। अमेरिका ने अपने सैन्य ठिकानों से जवानों को हटाने के संकेत दिए हैं, जिससे संभावित सैन्य टकराव की आशंका गहरा गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात और बिगड़े तो पश्चिम एशिया में नया संकट खड़ा हो सकता है, जिसका असर वहां रह रहे भारतीयों पर भी पड़ेगा।







