बरेली: बरेली के निलंबित सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री एक बार फिर अपने विवादित बयानों को लेकर चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने केंद्र सरकार को खुली चुनौती देते हुए अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 यानी SC/ST एक्ट को समाप्त करने की मांग की है। अग्निहोत्री ने सरकार को 6 फरवरी तक का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि तय समयसीमा तक यह कानून वापस नहीं लिया गया, तो केंद्र सरकार को “उखाड़ फेंकने” का आंदोलन किया जाएगा।
सोमवार को दिए गए बयान में अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि उनका संघर्ष कभी राज्य सरकार के खिलाफ नहीं था, बल्कि शुरू से ही केंद्र सरकार उनकी लड़ाई का मुख्य निशाना रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार राज्य प्रशासन पर दबाव बनाकर भेदभावपूर्ण रवैया अपना रही है। अग्निहोत्री रविवार रात वाराणसी पहुंचे थे, जहां उन्होंने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से मुलाकात कर आगे की रणनीति पर चर्चा की।
उन्होंने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा यूजीसी के नए रेगुलेशन, 2026 पर रोक लगाए जाने के बावजूद असली मुद्दा SC/ST एक्ट का दुरुपयोग है। उनके अनुसार, इस कानून के कुछ प्रावधानों का इस्तेमाल संस्थागत हथियार की तरह किया जा रहा है, जिससे समाज में असंतोष और आंतरिक अशांति का खतरा बढ़ रहा है। अग्निहोत्री ने कहा कि जाति-आधारित भेदभाव को कभी भी कानून के जरिए दबाव बनाने का माध्यम नहीं बनाना चाहिए।
अग्निहोत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार राज्य को कमजोर करने की कोशिश कर रही है और यहां तक दावा किया कि राज्य का फंड गुजरात भेजने की व्यवस्था की जा रही है। इससे पहले प्रयागराज में माघ मेले के दौरान शंकराचार्य के स्नान को लेकर हुए विवाद के बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दिया था, जिसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया।
ANI से बातचीत में उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कानूनों का दुरुपयोग जारी रहा तो इसके गंभीर सामाजिक परिणाम सामने आ सकते हैं। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं, वहीं सरकार की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।







