नयी दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तमिलनाडु दौरे से पहले राज्य की सियासत गरमा गई है। मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने शुक्रवार को भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए उस पर तमिलनाडु के साथ बार-बार विश्वासघात करने और राज्य की प्रमुख मांगों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। स्टालिन ने शिक्षा, भाषा, स्वास्थ्य, अवसंरचना और वित्तीय अधिकारों से जुड़े कई मुद्दों को उठाकर केंद्र सरकार से सीधे सवाल किए।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में मुख्यमंत्री ने समग्र शिक्षा अभियान के तहत तमिलनाडु को मिलने वाली 3,458 करोड़ रुपये की राशि जारी न होने पर नाराजगी जताई। इसके साथ ही उन्होंने परिसीमन को लेकर केंद्र से स्पष्ट आश्वासन मांगा कि इससे राज्य की लोकसभा सीटों में कोई कटौती नहीं की जाएगी। स्टालिन ने राज्यपाल की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि वे केंद्र सरकार के एजेंट की तरह काम कर रहे हैं और इससे राज्य प्रशासन प्रभावित हो रहा है।
मुख्यमंत्री ने तमिल भाषा और संस्कृति के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता न मिलने पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार तमिल भाषा के प्रति प्रेम दिखाने का दावा तो करती है, लेकिन वास्तविक सहयोग नहीं दे रही। इसके अलावा, उन्होंने कल्याणकारी योजनाओं, बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य सेवाओं और आपदा राहत कोषों में देरी को लेकर भी केंद्र को घेरा।
स्टालिन ने मदुरै एम्स परियोजना में हो रही देरी को लेकर भी कटाक्ष किया और इसे “दशक भर से अधूरा सपना” बताया। साथ ही होसुर हवाई अड्डे, कोयंबटूर–मदुरै मेट्रो परियोजना, कीझाड़ी रिपोर्ट के प्रकाशन और मनरेगा से जुड़े वादों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने एक बार फिर तमिलनाडु को NEET परीक्षा से छूट देने की राज्य की सर्वसम्मत मांग को दोहराया।
मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि तमिलनाडु की जनता राज्य की उपेक्षा करने वाले भाजपा गठबंधन को आगामी विधानसभा चुनावों में करारा जवाब देगी। दूसरी ओर, विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा और उसके सहयोगी दलों की गतिविधियां तेज हो गई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज चेंगलपट्टू जिले के मदुरंथकम में एक जनसभा को संबोधित करेंगे, जहां एआईएडीएमके के साथ एनडीए गठबंधन की औपचारिक घोषणा की जाएगी।







