Lung cancer risk rises in Bihar, experts warn against toxic air and water

बक्सर: पूरे भारत में हवा की गुणवत्ता लगातार खराब हो रही है, जिसके बीच विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बढ़ते प्रदूषण और भोजन, पानी व दैनिक उपयोग की वस्तुओं में व्यापक संदूषण के कारण धूम्रपान न करने वालों में भी फेफड़ों के कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। अमेरिका के वेलस्पन अस्पताल के वरिष्ठ पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. तारकेश्वर तिवारी ने बताया कि बिहार उन राज्यों में शामिल है, जहां सर्दियों के महीनों में हवा की गुणवत्ता सबसे खराब रहती है, और यहां भूजल (ग्राउंड वॉटर) के गंभीर संदूषण की अतिरिक्त चुनौती भी है। बक्सर के सोनबरसा में अपने माता-पिता से मिलने आए डॉ. तारकेश्वर तिवारी ने कहा कि पानी में प्रदूषण, खराब रहन-सहन और जीवनशैली के कारण फेफड़ों सहित कई अंगों के कैंसर में तेज वृद्धि हुई है।

उन्होंने विशेष रूप से बताया कि बिहार के 18 से अधिक जिलों (बक्सर, भोजपुर, और पटना सहित) के भूजल में आर्सेनिक संदूषण पाया गया है। यहां आर्सेनिक खाद्य श्रृंखला में प्रवेश कर चुका है, जिससे सब्जियां, दूध और स्थानीय पर्यावरण प्रभावित हो रहे हैं। हाल ही में हुए लांसेट ईक्लिनिकलमेडिसिन के एक अध्ययन से पता चलता है कि भारत में फेफड़ों के कैंसर के अधिकांश मरीज़ धूम्रपान न करने वाले हैं, जिसका मुख्य कारण लंबे समय तक प्रदूषित हवा के संपर्क में रहना है। अनुमान है कि भारत में 1.5 करोड़ से अधिक लोग फेफड़ों के कैंसर से पीड़ित हैं।

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डॉ. तिवारी ने कहा कि PM2.5 जैसे पार्टिकुलेट मैटर के लंबे समय तक संपर्क में रहने से फेफड़ों की कोशिकाएं बदल जाती हैं और कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि ‘अब धूम्रपान न करने वालों में एडेनोकार्सिनोमा (Adenocarcinoma) फेफड़ों के कैंसर का सबसे आम रूप है।’ डॉ. तारकेश्वर तिवारी ने कहा कि अत्यधिक उर्वरक और कीटनाशकों के उपयोग के कारण आज शुद्ध भोजन मिलना ‘लगभग असंभव’ है, जिससे स्वास्थ्य पर गंभीर परिणाम हो रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदूषण के कारण मरीजों की स्थिति बिगड़ने से दवाइयां कम प्रभावी होती जा रही हैं। उन्होंने बिहार में स्वास्थ्य सेवा वितरण में कमियों को उजागर करते हुए कहा कि यहां विशेषज्ञों की गंभीर कमी है, और बुनियादी स्क्रीनिंग सेवाओं का भी अभाव है।