
लाइफस्टाइल: TFM 2026 (टाइम्स फ्यूचर ऑफ मैटरनिटी) में इस बार गर्भावस्था के दौरान सही पोषण को लेकर खास चर्चा की गई। विशेषज्ञ डॉक्टरों ने बताया कि प्रेग्नेंसी के हर ट्राइमेस्टर में मां और होने वाले बच्चे की जरूरतें अलग-अलग होती हैं, इसलिए डाइट भी उसी हिसाब से संतुलित और समझदारी से चुनी जानी चाहिए।
पहला ट्राइमेस्टर (0–3 महीने) में मतली, उल्टी और थकान आम समस्याएं होती हैं। इस दौरान हल्का, आसानी से पचने वाला भोजन लेने की सलाह दी जाती है। डॉक्टरों के अनुसार, फोलिक एसिड से भरपूर आहार जैसे हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, खट्टे फल और साबुत अनाज बेहद जरूरी हैं। तला-भुना, ज्यादा मसालेदार और बाहर का जंक फूड खाने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे गैस और उल्टी की समस्या बढ़ सकती है।
दूसरा ट्राइमेस्टर (4–6 महीने) को सबसे स्थिर चरण माना जाता है। इस समय प्रोटीन, कैल्शियम और आयरन की जरूरत बढ़ जाती है। दूध, दही, पनीर, अंडे, दालें, नट्स और हरी सब्जियां डाइट में शामिल करने की सलाह दी जाती है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी कि कच्चा या अधपका मांस, अनपाश्चराइज्ड डेयरी उत्पाद और ज्यादा मीठे खाद्य पदार्थों से दूरी बनाए रखना जरूरी है।
तीसरा ट्राइमेस्टर (7–9 महीने) में बच्चे का तेजी से विकास होता है। इस दौरान फाइबर, ओमेगा-3 फैटी एसिड और पर्याप्त तरल पदार्थ लेना बेहद अहम है। फल, सब्जियां, साबुत अनाज और पर्याप्त पानी कब्ज और सूजन जैसी समस्याओं से राहत देते हैं। कैफीन, ज्यादा नमक और प्रोसेस्ड फूड से बचने की सलाह दी गई है, क्योंकि ये ब्लड प्रेशर और सूजन बढ़ा सकते हैं।
TFM 2026 में विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि हर गर्भवती महिला की शारीरिक जरूरतें अलग होती हैं, इसलिए किसी भी डाइट को अपनाने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूरी है। संतुलित आहार, नियमित जांच और सही जानकारी ही स्वस्थ मां और स्वस्थ शिशु की कुंजी है।






