नयी दिल्ली: सोना और चांदी की कीमतों में शुक्रवार को बड़ी गिरावट दर्ज की गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने और चांदी के वायदा कारोबार में गिरावट आई, क्योंकि निवेशकों ने इस हफ्ते की तेज बढ़त के बाद मुनाफावसूली की। फरवरी 2026 डिलीवरी वाले सोने के वायदा अनुबंध 10,000 रुपये यानी करीब 6% गिरकर 1,61,000 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गए। वहीं मार्च 2026 डिलीवरी वाली चांदी की कीमत 24,000 रुपये तक गिरने के बाद 3,75,900 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई।
हालांकि, इस गिरावट को छोड़ दें तो चांदी ने पिछले कुछ समय में जबरदस्त तेजी दिखाई है। गुरुवार को चांदी लगभग 109 डॉलर प्रति औंस पर बिक रही थी, लेकिन चीन में यह बढ़कर करीब 125 डॉलर प्रति औंस हो गई थी। यानी चीन और बाकी दुनिया के बाजार में लगभग 16 डॉलर प्रति औंस का अंतर है। एक किलोग्राम चांदी में लगभग 35 औंस होते हैं, जिससे चीन और अन्य देशों के बीच चांदी की कीमत में करीब 51,000 रुपये प्रति किलोग्राम का बड़ा अंतर बनता है।
चीन में चांदी महंगी होने का मुख्य कारण वहां की भारी मांग है। चीन दुनिया की कुल चांदी आपूर्ति का 65% से अधिक इस्तेमाल करता है। यहां चांदी केवल गहनों में ही नहीं बल्कि स्पॉट और फ्यूचर्स मार्केट में भी खरीदी-बेची जाती है। जैसे-जैसे वैश्विक आपूर्ति कम हो रही है, चीनी निवेशक इसे सुरक्षित निवेश मानकर बड़ी मात्रा में खरीद रहे हैं। इसके अलावा चीन की नई चांदी निर्यात नीति भी कीमतों को ऊपर धकेल रही है। जनवरी से केवल सरकारी लाइसेंस वाली कंपनियां ही चांदी का निर्यात कर सकती हैं, जिससे आपूर्ति और भी सीमित हो गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक बाजार में गिरावट के बावजूद चीन में मांग के चलते चांदी की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर बनी हुई हैं। निवेशकों के लिए यह निवेश और बचत का आकर्षक विकल्प बना हुआ है, जबकि भारत और अमेरिका में चांदी सस्ती बिक रही है।







