
लाइफ स्टाइल: आजकल गलत खान-पान और अस्वस्थ जीवनशैली के कारण पेट से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। गैस, पेट फूलना, डकारें, कब्ज और एसिडिटी जैसी परेशानियां आम हो गई हैं। लोग अक्सर इन्हें हल्का मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन लंबे समय तक ऐसी आदतें गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती हैं।
फोर्टिस हॉस्पिटल, शालीमार बाग के डॉ. पंकज शर्मा, डायरेक्टर, रोबोटिक, बेरिएट्रिक, लेप्रोस्कोपिक और जनरल सर्जरी विभाग के अनुसार, पेट का स्वास्थ्य सीधे हमारे रोजमर्रा के जीवन से जुड़ा होता है। देर रात खाना, ज्यादा मसाले और तला-भुना खाना, जल्दी-जल्दी खाना, कम पानी पीना, लंबे समय तक बैठे रहना, तनाव और नींद की कमी पाचन तंत्र को कमजोर कर देती हैं। इसका परिणाम बार-बार गैस, एसिडिटी और अपच के रूप में सामने आता है।
डॉक्टर शर्मा ने चेतावनी दी कि समस्या गंभीर तब मानी जाती है जब पेट में तेज दर्द, लगातार सीने में जलन, उल्टी में खून, काले स्टूल, अचानक वजन घटना या रात में खांसी और घुटन जैसे लक्षण दिखें। यह अल्सर, हायटल हर्निया, गॉलब्लैडर स्टोन या अन्य अंदरूनी पेट की समस्याओं की ओर इशारा कर सकता है। ऐसे मामलों में अल्ट्रासाउंड या एंडोस्कोपी जैसी जांच जरूरी है।
स्वस्थ जीवनशैली और खान-पान में छोटे बदलाव से पेट की समस्याओं में काफी सुधार लाया जा सकता है। हल्के गुनगुने पानी से दिन की शुरुआत, भोजन तय समय पर लेना, रात का खाना सोने से 2-3 घंटे पहले करना, तला-भुना और मसालेदार भोजन कम करना, दिन में 8-10 गिलास पानी पीना, 20-30 मिनट वॉक या हल्की एक्सरसाइज करना, चाय-कॉफी सीमित रखना और तनाव कम करने के लिए मेडिटेशन या ब्रेक लेना लाभकारी हैं।
डॉ. शर्मा के अनुसार, इन सरल उपायों से 60-70 फीसदी लोगों में गैस और एसिडिटी में सुधार दिखाई देता है। बार-बार गैस या एसिडिटी शरीर का अलार्म है, इसे अनदेखा करने की बजाय सही समय पर जांच और इलाज कराना चाहिए।
Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं है। डॉक्टर से परामर्श आवश्यक है।






