वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी सेना के पूर्व मनोचिकित्सक निदाल हसन को फायरिंग स्क्वॉड के जरिए दी जाने वाली मृत्युदंड की सजा के लाइव प्रसारण की योजना रद्द कर दी है। वर्ष 2009 में टेक्सास के फोर्ट हुड सैन्य अड्डे पर गोलीबारी कर 13 सैनिकों की हत्या करने और 32 अन्य लोगों को घायल करने के मामले में हसन को मृत्युदंड दिया जाना है। इस फैसले को लेकर अमेरिका समेत दुनियाभर में तीखी आलोचना हुई थी।
बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने कहा कि कुछ अच्छे और नेक इरादे वाले लोग किसी व्यक्ति को मरते हुए नहीं देखना चाहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि मृत्युदंड का सार्वजनिक प्रसारण आतंकवाद और हिंसक अपराधों के खिलाफ अमेरिका का कड़ा संदेश बन सकता था, लेकिन अब सजा का लाइव प्रसारण नहीं किया जाएगा।
ट्रंप ने सोशल मीडिया मंच ‘ट्रुथ सोशल’ पर स्पष्ट किया कि हसन को निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार फायरिंग स्क्वॉड के जरिए ही मृत्युदंड दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पीड़ितों के परिवार के सदस्य चाहें तो वहां उपस्थित रहकर न्याय की प्रक्रिया देख सकते हैं।
मानवाधिकार संगठनों ने जताई थी आपत्ति
इससे पहले पेंटागन ने तीन दिसंबर 2026 को हसन को फायरिंग स्क्वॉड के जरिए मृत्युदंड देने और इसकी लाइव-स्ट्रीमिंग करने की योजना घोषित की थी। इस घोषणा के बाद मानवाधिकार संगठनों और कई अन्य लोगों ने कड़ा विरोध जताया। संयुक्त राष्ट्र ने भी इस योजना की तीखी आलोचना की थी।
अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने शुरुआत में लाइव प्रसारण के फैसले का समर्थन करते हुए कहा था कि लोगों को ऐसे अपराधों के गंभीर परिणामों को समझना चाहिए। हालांकि, आलोचना बढ़ने के बाद ट्रंप ने प्रसारण की योजना वापस लेने की घोषणा की। पेंटागन के प्रवक्ता शॉन पार्नेल ने कहा कि रक्षा सचिव राष्ट्रपति के फैसले का समर्थन करते हैं।
क्या है फोर्ट हुड हमले का मामला?
पांच नवंबर 2009 को टेक्सास स्थित फोर्ट हुड सैन्य अड्डे की एक मेडिकल इमारत में हुई गोलीबारी में 13 लोगों की मौत हुई थी और 32 अन्य घायल हुए थे। उस समय सैनिक चिकित्सकीय जांच और टीकाकरण के लिए वहां मौजूद थे। हसन ने बाद में अदालत में हमलावर होने की बात स्वीकार की थी। वर्ष 2013 में कोर्ट मार्शल के दौरान उसने कहा था कि उसे लगता था कि वह अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना से मुसलमानों और तालिबान की रक्षा कर रहा था।
हसन के वकील जॉन गैलिगन ने लाइव-स्ट्रीमिंग की योजना को अनुचित बताते हुए कहा कि इसे रद्द करना अप्रत्याशित नहीं था। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस योजना से सैन्य न्याय व्यवस्था की छवि को नुकसान पहुंचा है।
अमेरिकी सैन्य कानून के तहत मृत्युदंड लागू करने से पहले राष्ट्रपति की मंजूरी और अपीलीय समीक्षा आवश्यक है। ऐसे में हसन की सजा के क्रियान्वयन से पहले संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं का पूरा होना जरूरी है।







