
सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास चीनी गतिविधियों ने खड़े किए रणनीतिक सवाल
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने हाल ही में ढाका स्थित चीनी राजदूत याओ वेन को तीस्ता परियोजना क्षेत्र का दौरा कराया। यह इलाका भारत के सिलीगुड़ी कॉरिडोर—जिसे ‘चिकन नेक’ कहा जाता है—के बेहद करीब है। मुहम्मद यूनुस सरकार का कहना है कि यह दौरा केवल तीस्ता नदी के व्यापक प्रबंधन और पुनर्स्थापन परियोजना के तकनीकी मूल्यांकन के लिए था।लेकिन भारत के रणनीतिक विशेषज्ञ इसे सामान्य कदम नहीं मान रहे। तीस्ता नदी भारत और बांग्लादेश के बीच दशकों से विवाद का विषय रही है। इस परियोजना में चीन की सीधी एंट्री से न सिर्फ जल बंटवारे का संतुलन बिगड़ सकता है, बल्कि पश्चिम बंगाल के लिए जल संकट का खतरा भी पैदा हो सकता है।
तीस्ता प्रोजेक्ट को चीन को सौंपने का फैसला भारत के लिए बड़ा कूटनीतिक झटका माना जा रहा है। सिलीगुड़ी कॉरिडोर भारत के उत्तर–पूर्व को देश के बाकी हिस्से से जोड़ने वाली इकलौती ज़मीनी कड़ी है। इस इलाके के पास चीन की सक्रियता भारत की सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील मानी जाती है। भारत और बांग्लादेश के रिश्ते पहले से ही तनावपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं। ऐसे में यूनुस सरकार का यह कदम नई भू–राजनीतिक चुनौती खड़ी कर सकता है। सवाल उठ रहा है—क्या बांग्लादेश भारत के साथ संतुलन बिगाड़कर चीन के पाले में जा रहा है? और क्या तीस्ता विवाद अब केवल जल समझौता न रहकर एक बड़ा रणनीतिक मोर्चा बन जाएगा?






