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बड़गाम से बर्लिन तक प्रदर्शन: अली खामेनेई के समर्थन-विरोध में सड़कों पर उतरे लोग

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Protests from Budgam to Berlin: People take to the streets in support and opposition of Ali Khamenei

वॉशिंगटन: पश्चिम एशिया में भड़की भीषण जंग ने वैश्विक राजनीति को दो स्पष्ट ध्रुवों में बांट दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के मिसाइल उद्योग और नौसेना को निशाना बनाने के लिए बड़े सैन्य अभियान की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय तनाव और गहरा गया है। अमेरिका ने इस कार्रवाई को क्षेत्रीय सुरक्षा और संभावित खतरों को खत्म करने के उद्देश्य से उठाया गया कदम बताया है। वहीं इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे अपने देश के अस्तित्व की रक्षा के लिए जरूरी करार दिया है।

संघर्ष के बाद दुनिया के कई हिस्सों में समर्थन और विरोध दोनों देखने को मिले। भारत के कश्मीर से लेकर बर्लिन और ब्रिटेन तक लोग सड़कों पर उतर आए। कुछ देशों ने ईरान की कार्रवाई की आलोचना करते हुए अमेरिका और इज़राइल का समर्थन किया, जबकि अन्य देशों ने इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरनाक बताया।

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यूरोपीय देशों और यूरोपीय संघ ने तनाव कम करने और कूटनीतिक समाधान की अपील की है। फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों, जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने संयुक्त बयान जारी कर वार्ता को फिर से शुरू करने पर जोर दिया।

दूसरी ओर रूस और चीन ने ईरान के समर्थन में बयान दिए। रूस की सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष दिमित्री मेदवेदेव ने अमेरिका की कार्रवाई की आलोचना की और इसे वैश्विक स्थिरता के लिए खतरा बताया। वहीं ब्राजील ने भी सैन्य हमलों की निंदा करते हुए बातचीत को ही स्थायी समाधान बताया।

इस बीच कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने मुंबई में कहा कि ईरान क्षेत्रीय अस्थिरता का प्रमुख कारण बना हुआ है और उसके परमाणु कार्यक्रम पर नियंत्रण जरूरी है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और जी7 जैसे वैश्विक मंचों के प्रयासों का भी उल्लेख किया। बढ़ते तनाव के बीच दुनिया की निगाहें अब कूटनीतिक समाधान और संभावित शांति प्रयासों पर टिकी हुई हैं।

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