नई दिल्ली: पीएम मोदी ने चीनी राष्ट्रपति के साथ बैठक में भारत-चीन के संबंधों को मजबूत करने की जरूरत पर बल दिया, जो आपसी विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता पर आधारित हो। पीएम मोदी ने चीन के साथ विभिन्न मुद्दों पर हुई बातचीत की तरक्की पर खुशी जाहिर की। पीएम मोदी ने कैलाश मानसरोवर यात्रा और दोनों देशों के बीच सीधी उड़ान सेवा के शुरू होने पर बात की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपनी द्विपक्षीय बैठक के दौरान, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा, ‘चीन और भारत दो प्राचीन सभ्यताएं हैं। हम दुनिया के दो सबसे अधिक आबादी वाले देश हैं, और हम ग्लोबल साउथ के महत्वपूर्ण सदस्य भी हैं। हम दोनों अपने लोगों की भलाई में सुधार लाने, विकासशील देशों की एकजुटता और कायाकल्प को बढ़ावा देने, और मानव समाज की प्रगति को बढ़ावा देने की ऐतिहासिक ज़िम्मेदारी निभाते हैं। दोनों देशों के लिए यह सही विकल्प है कि वे ऐसे मित्र बनें जिनके बीच अच्छे पड़ोसी और सौहार्दपूर्ण संबंध हों, ऐसे साझेदार बनें जो एक-दूसरे की सफलता को सक्षम बनाएं, और ड्रैगन और हाथी को एक साथ लाएं।’जिनपिंग ने कहा ‘आज दुनिया सदी में एक बार होने वाले बदलावों से गुजर रही है। अंतरराष्ट्रीय स्थिति अस्थिर और अराजक दोनों है। इस वर्ष चीन-भारत राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ है।
दोनों पक्षों को अपने संबंधों को रणनीतिक ऊंचाई और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखने और संभालने की आवश्यकता है। हमें बहुपक्षवाद को बनाए रखने, एक बहुध्रुवीय विश्व और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में अधिक लोकतंत्र लाने के लिए मिलकर काम करने, और एशिया और दुनिया भर में शांति और समृद्धि में अपना सच्चा योगदान देने की अपनी ऐतिहासिक ज़िम्मेदारी को भी पूरा करना होगा।’ एससीओ शिखर सम्मेलन से पहले पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच बैठक शुरू हो गई है। अमेरिका के टैरिफ युद्ध के बीच दोनों नेताओं की मुलाकात को बेहद अहम माना जा रहा है। खासकर दोनों देशों के रिश्तों को बेहतर बनाने की दिशा में भी इस बैठक की अहम भूमिका है। दोनों नेताओं की बीच करीब 40 मिनट बातचीत होनी है। एससीओ में 10 सदस्य देश हैं। जिनमें चीन, भारत के अलावा, बेलारूस, ईरान, कजाखस्तान, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान शामिल हैं। इसके अलावा, कई संवाद साझेदार और पर्यवेक्षक देश भी शामिल हैं। भारत 2017 से एससीओ का सदस्य है, और 2005 से पर्यवेक्षक रहा है। अपनी सदस्यता अवधि के दौरान, भारत ने 2020 में एससीओ शासनाध्यक्ष परिषद और 2022 से 2023 तक एससीओ राष्ट्राध्यक्ष परिषद की अध्यक्षता की है।







