Home अंतरराष्ट्रीय नील कात्याल ने पलटा Donald Trump का टैरिफ खेल, ऐतिहासिक फैसले से...

नील कात्याल ने पलटा Donald Trump का टैरिफ खेल, ऐतिहासिक फैसले से सुर्खियों में

84
0
Neal Katyal reverses Donald Trump's tariff game, making headlines with historic decision

वॉशिंगटन: अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापक वैश्विक टैरिफ को असंवैधानिक करार देकर बड़ा फैसला सुनाया। इस ऐतिहासिक फैसले के केंद्र में एक भारतीय मूल का नाम उभरा, नील कात्याल। नील ने ही अदालत में ट्रंप के उस कदम को चुनौती दी, जिसमें 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट यानी IEEPA का इस्तेमाल कर लगभग सभी व्यापारिक साझेदार देशों पर टैरिफ लगाए गए थे। नील कात्याल ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि राष्ट्रपति ने आपात आर्थिक शक्तियों का गलत इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि टैरिफ दरअसल टैक्स होते हैं और टैक्स लगाने का अधिकार केवल अमेरिकी कांग्रेस को है, न कि राष्ट्रपति को। कात्याल ने इन टैरिफ को अन्यायपूर्ण और असंवैधानिक टैक्स बताया।

सुप्रीम कोर्ट ने छह-तीन के बहुमत से कहा कि संविधान के तहत टैक्स लगाने की शक्ति कांग्रेस के पास है। फैसले के बाद कात्याल ने कहा कि यह कानून के शासन की जीत है। उनके अनुसार, यह मामला किसी एक राष्ट्रपति के खिलाफ नहीं, बल्कि शक्तियों के संतुलन का है। उन्होंने कहा कि अमेरिका की व्यवस्था यह सुनिश्चित करती है कि कोई भी व्यक्ति, चाहे वह कितना ही शक्तिशाली क्यों न हो, संविधान से ऊपर नहीं हो सकता। यह मामला छोटे अमेरिकी कारोबारियों द्वारा दायर किया गया था, जिन्हें लगा कि टैरिफ से उनका व्यापार प्रभावित हो रहा है। ट्रंप प्रशासन ने टैरिफ को राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक दबाव का जरूरी कदम बताया था। लेकिन अदालत ने साफ कहा कि आपात शक्तियों के नाम पर राष्ट्रपति व्यापक टैक्स नहीं लगा सकते। नील कात्याल का जन्म शिकागो में भारतीय प्रवासी माता-पिता के घर हुआ। उनके पिता इंजीनियर और माता डॉक्टर थीं।

GNSU Admission Open 2026

उन्होंने डार्टमाउथ कॉलेज और येल लॉ स्कूल से पढ़ाई की। वह अमेरिका के कार्यवाहक सॉलिसिटर जनरल रह चुके हैं और सुप्रीम कोर्ट में 50 से अधिक मामलों में पैरवी कर चुके हैं। वह कई बड़े संवैधानिक मामलों में अहम भूमिका निभा चुके हैं। कात्याल वर्तमान में मिलबैंक एलएलपी में साझेदार हैं और जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी लॉ सेंटर में प्रोफेसर हैं। उन्होंने 1965 के वोटिंग राइट्स एक्ट की संवैधानिकता का बचाव किया, ट्रंप के 2017 ट्रैवल बैन को चुनौती दी और कई राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों में सरकार का प्रतिनिधित्व किया। वह जॉर्ज फ्लॉयड हत्या मामले में मिनेसोटा राज्य के विशेष अभियोजक भी रह चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला भविष्य में किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति की आपात आर्थिक शक्तियों के इस्तेमाल पर सीमा तय करता है। कात्याल ने कहा कि एक प्रवासी परिवार का बेटा अदालत में खड़ा होकर कह सकता है कि राष्ट्रपति कानून तोड़ रहे हैं, और अदालत उसे सुनती है, यही लोकतंत्र की ताकत है। यह फैसला अमेरिकी संविधान और शक्तियों के संतुलन के लिए एक मील का पत्थर माना जा रहा है।





GNSU Admission Open 2026