
वर्ल्ड डेस्क: फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ग्रीनलैंड को लेकर दी गई टैरिफ धमकियों पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूक्रेन, ग्रीनलैंड या दुनिया के किसी भी हिस्से में किसी भी प्रकार का दबाव फ्रांस को अपने सिद्धांतों से पीछे हटने पर मजबूर नहीं कर सकता। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मैक्रों ने कहा कि यूरोप की संप्रभुता से कोई समझौता नहीं होगा और यदि अमेरिका टैरिफ लगाता है तो यूरोपीय देश एकजुट होकर जवाब देंगे।
मैक्रों ने जोर देकर कहा कि फ्रांस का यूक्रेन को समर्थन और ग्रीनलैंड में डेनमार्क के सैन्य अभ्यास में भागीदारी अंतरराष्ट्रीय कानून और क्षेत्रीय सुरक्षा के सिद्धांतों पर आधारित है। उनके मुताबिक आर्कटिक क्षेत्र यूरोप की सामरिक सुरक्षा के लिए बेहद अहम है और इस पर किसी तरह की धमकी स्वीकार नहीं की जाएगी।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने भी ट्रंप की चेतावनी को अनुचित बताया। उन्होंने कहा कि नाटो सहयोगियों की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों पर टैरिफ लगाना गलत संदेश देता है। स्टारमर ने दोहराया कि ग्रीनलैंड के भविष्य का फैसला केवल डेनमार्क और वहां के लोगों को करना है।
यूरोपीय संघ ने भी इस मुद्दे पर गहरी चिंता जताई है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा कि संभावित टैरिफ ट्रांस-अटलांटिक संबंधों को नुकसान पहुंचा सकते हैं और आर्थिक अस्थिरता पैदा कर सकते हैं। उन्होंने डेनमार्क और ग्रीनलैंड के साथ एकजुटता व्यक्त करते हुए कहा कि क्षेत्रीय अखंडता अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की बुनियाद है। ईयू ने इस पर सामूहिक रणनीति तय करने के लिए आपात बैठक बुलाने का ऐलान किया है।
गौरतलब है कि ट्रंप ने ग्रीनलैंड को अमेरिका द्वारा खरीदे जाने की इच्छा दोहराई है और असहमति की स्थिति में 2026 से 10 से 25 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की चेतावनी दी है। डेनमार्क और ग्रीनलैंड के नेताओं ने इस प्रस्ताव को खारिज करते हुए आत्मनिर्णय के अधिकार पर जोर दिया है। यह विवाद पश्चिमी देशों के बीच नए कूटनीतिक तनाव का संकेत बनता दिख रहा है।






