एंटरटेनमेंट डेस्क: पिछले साल दीपिका पादुकोण ने मां बनने के बाद आठ घंटे काम की शिफ्ट को लेकर इ़ंडस्ट्री में एक नई बहस को जन्म दे दिया। हालांकि, अपनी इस शर्त के चलते दीपिका के हाथ से ‘स्पिरिट’ और ‘कल्कि 2898 एडी’ का सीक्वल जैसी दो बड़ी फिल्में भी निकल गईं। लेकिन दीपिका अपनी डिमांड पर अड़ी रहीं। उनकी इस शर्त का इंडस्ट्री के कई लोगों ने समर्थन भी किया। अब आठ घंटे काम करने की मांग पर राइटर-एक्टर सौरभ शुक्ला ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। इंडिया टुडे से बात करते हुए आठ घंटे शिफ्ट के मुद्दे पर सौरभ शुक्ला ने कहा कि क्रिएटिव फील्ड में काम के घंटे तय नहीं होते।
किसी प्रोजेक्ट की शूटिंग के दौरान तय शेड्यूल का पालन करने से कहीं ज्यादा निरंतरता मायने रखती है। अगर कभी-कभी क्रिएटिविटी को बनाए रखने के लिए एक्स्ट्रा समय काम करना पड़े तो शिकायत नहीं करनी चाहिए। अगर आप पूरी तरह से काम में डूबे हुए हैं, तो मुझे लगता है कि अगर आप अचानक अपने काम के घंटों से आधा घंटा या एक घंटा ज्यादा काम कर रहे हैं, तो आपको शिकायत नहीं करनी चाहिए। इसके बदले में आपको बहुत कुछ मिल रहा है। विचारों की निरंतरता और उस प्रवाह की निरंतरता। सौरभ ने आगे बताया कि सेट पर काम के घंटों पर ध्यान देने के बजाय, अभिनेताओं को काम पर ध्यान देना चाहिए। समय सीमा होनी चाहिए, लेकिन यह मुख्य बात नहीं है।
मुख्य बात वह रचना है जिसे आप बना रहे हैं। घड़ी पर ध्यान देने के बजाय कि अरे! 6 या 8 बज गए हैं और मुझे घर जाना है, हमें अपने काम पर अधिक ध्यान देना चाहिए। पिछले साल दीपिका ने आठ घंटे काम को लेकर एक नई बहस शुरू की थी। इसके बाद ब्रूट इंडिया के साथ एक बातचीत में दीपिका ने अपनी मांग पर बात करते हुए बताया था कि कई शीर्ष पुरुष अभिनेता सख्ती से आठ घंटे काम करते हैं। हालांकि, जब उन्होंने मां बनने के बाद इसी तरह की मांग रखी, तो उनकी मांग को बेतुका बताया गया। एक्ट्रेस ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि मैं जो मांग रही हूं वह बेतुकी और गलत है। मुझे लगता है कि इस सिस्टम में लंबे समय तक काम कर चुके व्यक्ति को ही पता होगा कि हम किन परिस्थितियों में काम करते हैं। मैं ऐसी मांग करने वाली पहली नहीं हूं। वास्तव में, कई अभिनेता, पुरुष अभिनेता, वर्षों से आठ घंटे की शिफ्ट में काम कर रहे हैं और यह कभी सुर्खियों में नहीं आया।







