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इश्क पर गुलजार-जावेद-इरशाद के अलग अंदाज़, मोहब्बत में ‘ख्वाब’ भी और ‘रिस्क’ भी

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Gulzar, Javed, and Irshad's unique take on love: love is both a dream and a risk.

एंटरटेनमेंट डेस्क: वैलेंटाइन डे के खास मौके पर जब इश्क की बातें होती हैं, तो हिंदी सिनेमा के कुछ नाम अपने आप ज़हन में उतर आते हैं। Gulzar, Javed Akhtar और Irshad Kamil—ये तीनों ऐसे गीतकार हैं, जिन्होंने प्रेम को शब्दों में ढालकर उसे पीढ़ियों तक यादगार बना दिया। इनकी कलम से निकले गीतों ने न जाने कितनी प्रेम कहानियों को आवाज़ दी है।

गुलजार ने इश्क को मासूमियत, शरारत और गहराई के रंगों में रंगा। उनके गीतों में प्रेम कभी ‘पहली बार मोहब्बत’ की झिझक बनकर सामने आता है, तो कभी ‘मेरा कुछ सामान’ जैसी टीस बनकर। उन्होंने रिश्तों की नाज़ुक भावनाओं को बेहद सादगी और काव्यात्मक अंदाज़ में पिरोया। उनके शब्दों में चांद, रात, सांस और खामोशी भी इश्क का हिस्सा बन जाते हैं।

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जावेद अख्तर ने प्रेम को खूबसूरत एहसास और जीवन की रौशनी के रूप में पेश किया। ‘एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा’ जैसी पंक्तियां आज भी आशिकों की जुबां पर हैं। उनके गीतों में मोहब्बत एक सुकून है, एक ख्वाब है, जो जिंदगी को धूप से छांव में बदल देता है। उन्होंने प्रेम में खो जाने, साथ चलने और दुनिया को नया नजरिया देने की बात बड़े ही रोमांटिक अंदाज़ में कही।

वहीं इरशाद कामिल ने इश्क को आधुनिक दौर की भावनाओं से जोड़ा। उनके गीतों में प्यार कभी ‘रिस्क’ बनकर सामने आता है, तो कभी पूरी दुनिया से अलग एक निजी एहसास। ‘तुमसे ही दिन होता है’ जैसी पंक्तियां रिश्तों की गहराई को दर्शाती हैं।

इन तीनों गीतकारों ने अलग-अलग अंदाज़ में इश्क को जिया और लिखा। यही वजह है कि इनके गीत आज भी मोहब्बत करने वालों के दिलों में बसे हुए हैं।

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