कानपुर (उत्तर प्रदेश): दीप पर्व परिवार के साथ मनाने के लिए दिल्ली, नोएडा और गुरुग्राम सहित अन्य शहरों से अपने गृह नगर लौट रहे लोगों को सफर के दौरान भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। त्योहारी भीड़ के कारण रेल और बस सेवाओं पर दबाव बढ़ गया है। ट्रेनों में आरक्षित सीटें उपलब्ध नहीं होने से यात्रियों को परेशानी हो रही है, वहीं बसों में भी क्षमता से अधिक भीड़ के चलते लोगों को लंबी दूरी खड़े होकर तय करनी पड़ रही है।
रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के लिए नियमित ट्रेनों के साथ कई विशेष ट्रेनें संचालित की हैं, लेकिन यात्रियों की भारी संख्या के सामने ये इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं। आरक्षण नहीं मिलने पर लोग बसों का रुख कर रहे हैं। कई ट्रेनों के आरक्षित कोचों में भी सामान्य टिकट लेकर यात्री सफर कर रहे हैं। इससे पहले से सीट आरक्षित कराने वाले यात्रियों को भी असुविधा हो रही है। एसी कोचों में भी भीड़ के पहुंचने से स्थिति और कठिन हो गई है।
रेलवे प्लेटफॉर्मों पर जीआरपी और आरपीएफ के जवान भीड़ को नियंत्रित करने में जुटे हैं। फुटओवर ब्रिज और प्लेटफॉर्मों पर लगातार उद्घोषणा कर यात्रियों को एक जगह जमा होने से रोकने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि किसी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
दूसरी ओर, निजी बस ऑपरेटरों पर त्योहार के दौरान मनमाना किराया वसूलने के आरोप लग रहे हैं। सामान्य दिनों में दिल्ली से कानपुर तक सीट का किराया करीब 450 रुपये और स्लीपर बर्थ का किराया 700 से 800 रुपये रहता है। लेकिन त्योहार के दौरान सीट के लिए 2,500 रुपये और बर्थ के लिए 5,000 रुपये तक वसूले जाने की शिकायतें हैं। इंटरसिटी, शताब्दी और कल्पना ट्रैवल्स सहित कई ऑपरेटरों ने भीड़ वाले मार्गों पर अतिरिक्त बसें उतारी हैं।
यात्रियों का आरोप है कि कुछ निजी बस संचालक डायनेमिक फेयर के नाम पर किराये में भारी बढ़ोतरी कर रहे हैं। एक पीएनआर पर कई यात्रियों की टिकट बुक होने के बाद कुछ लोगों के यात्रा नहीं करने पर पूरी बुकिंग रद्द कर शेष यात्रियों से नए किराये पर टिकट लेने की शिकायतें भी सामने आई हैं।
उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की बसें भी इस मार्ग पर संचालित हैं, लेकिन इनमें सुविधाएं सीमित हैं। कानपुर से दिल्ली के लिए निगम की एसी बस सेवा उपलब्ध नहीं है। निजी बसें सात से आठ घंटे में दूरी तय करती हैं, जबकि रोडवेज बसों को 10 से 12 घंटे लगते हैं। ऐसे में यात्रियों को बेहतर सुविधा और किफायती किराये के बीच संतुलन बनाने में मुश्किल हो रही है।







