
सासाराम (रोहतास): धनतेरस का त्योहार हो और सोने-चांदी की खरीदारी न हो, ऐसा कम ही देखने को मिलता है। लेकिन इस पर्व पर बाजारों में सिर्फ आभूषणों की ही नहीं, बल्कि झाड़ू की भी खूब मांग रहती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, धनतेरस पर झाड़ू खरीदना शुभ माना जाता है और इसे मां लक्ष्मी का प्रतीक भी माना जाता है। इसी परंपरा के बीच सासाराम में एक ऐसा परिवार है, जिसने इंटरनेट की मदद से हुनर सीखा और आज उसी के दम पर अपना रोजगार चला रहा है।
दरअसल, सासाराम के मोकर गांव निवासी पंचूराम अपने परिवार के साथ कई वर्षों से झाड़ू बनाने और बेचने का काम कर रहे हैं। खास बात यह है कि उन्होंने झाड़ू बनाने का हुनर किसी प्रशिक्षित कारीगर से नहीं सीखा, बल्कि यूट्यूब पर उपलब्ध वीडियो देखकर इस काम की बारीकियां समझीं। शुरुआत में उन्होंने खुद अभ्यास किया और धीरे-धीरे इस काम में कुशलता हासिल कर ली। आज यही हुनर उनके परिवार की आजीविका का प्रमुख साधन बन चुका है।
पंचूराम के परिवार के सभी सदस्य इस काम में हाथ बंटाते हैं। परिवार के लोग मिलकर झाड़ू तैयार करते हैं और फिर उन्हें बाजार में बेचते हैं। इस तरह घर के सभी सदस्यों को रोजगार मिलता है और परिवार की जरूरतें भी पूरी होती हैं।
पंचूराम बताते हैं कि झाड़ू बनाने में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल पहले की तुलना में महंगा हो गया है। इसे तैयार करने में काफी मेहनत और समय लगता है। इसके बावजूद वे इस पारंपरिक काम को जारी रखे हुए हैं। हालांकि, धनतेरस और दीपावली जैसे त्योहारों के दौरान झाड़ू की मांग बढ़ने से छोटे कारोबारियों को कुछ बेहतर कमाई की उम्मीद रहती है।






