नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव की मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में गलत नाम और पिता के नाम दर्ज होने के मामले गंभीर हैं। कांग्रेस ने कहा कि ऐसी गड़बड़ियों को केवल सॉफ्टवेयर की त्रुटि बताकर जिम्मेदारी से बचना स्वीकार्य नहीं है। हालांकि, भाजपा को लाभ पहुंचाने की साजिश के पार्टी के आरोपों पर चुनाव आयोग और भाजपा का पक्ष इस बयान में उपलब्ध नहीं है।
कांग्रेस के संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने शनिवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के जरिए मतदाता सूची में कथित गलत प्रविष्टियों का मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि सूची में कुछ मतदाताओं के नाम और उनके पिता के नाम असामान्य तथा आपत्तिजनक तरीके से दर्ज किए गए हैं।
मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर सवाल
जयराम रमेश के अनुसार, एक मतदाता का नाम ‘राम ने यादव को मारा’ और उसके पिता का नाम ‘मूर्ख चंद्र यादव’ दर्ज है। इसी तरह, उन्होंने कुछ अन्य प्रविष्टियों का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी मतदाता के पिता के नाम वाले कॉलम में ‘बी. कॉम’ और किसी अन्य जगह ‘राम ने शर्मा का नाम’ लिखा हुआ है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि मतदाता सूचियों को दुरुस्त करने के उद्देश्य से शुरू की गई विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के बावजूद इस तरह की कथित गड़बड़ियां सूची की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती हैं। पार्टी ने इन मामलों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
वोट चोरी के आरोपों को लेकर भी हमला
जयराम रमेश ने दावा किया कि लोकसभा तथा हरियाणा, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल सहित विभिन्न राज्यों के चुनावों को लेकर उठाए गए सवालों से चुनाव प्रक्रिया पर लोगों का संदेह बढ़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने चुनाव आयोग के साथ मिलीभगत करके चुनावों में लाभ हासिल किया है। ये कांग्रेस के राजनीतिक आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि इस बयान में नहीं की गई है।
कांग्रेस ने यह भी कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की ओर से उठाए गए सवालों का जवाब देने के बजाय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा उन पर व्यक्तिगत हमले कर रहे हैं।
कांग्रेस ने रखीं पांच प्रमुख मांगें
पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे, एसआईआर प्रक्रिया पर रोक और मतदाता सूची की निष्पक्ष जांच की मांग की है। इसके अलावा, कांग्रेस ने मतदाता सूची का पूरा मशीन-रीडेबल डेटा सार्वजनिक करने तथा प्रत्येक पात्र नागरिक के मताधिकार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग उठाई है।







