कानपुर में ‘कार्डियोप्रिवेंट 2026’ सम्मेलन, हृदय रोगों की रोकथाम पर मंथन
‘CardioPrevent 2026’ conference in Kanpur; deliberations on the prevention of heart diseases

कानपुर: देश में कम उम्र में बढ़ते हृदय रोगों और हार्ट अटैक के मामलों के बीच विशेषज्ञों ने समय पर जांच, स्वस्थ जीवनशैली और जोखिम कारकों की पहचान को बेहद जरूरी बताया है। कार्डियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया के उत्तर प्रदेश चैप्टर के तत्वावधान में एलपीएस इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी, कानपुर में राज्य स्तरीय सम्मेलन ‘कार्डियोप्रिवेंट 2026’ का आयोजन किया गया। ‘विज्ञान से कार्य तक: हृदय रोग रोकथाम का भविष्य’ विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में देश के विभिन्न हिस्सों से आए विशेषज्ञों ने आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों और हृदय रोगों से बचाव के उपायों पर चर्चा की।

सम्मेलन के दौरान आयोजित नौ वैज्ञानिक सत्रों में कुल 34 व्याख्यान प्रस्तुत किए गए। इनमें लखनऊ, वाराणसी, अलीगढ़, मेरठ, नई दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और रांची के हृदय रोग विशेषज्ञों ने भाग लिया।

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रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल की जांच पर जोर

एसजीपीजीआईएमएस, लखनऊ के डॉ. सत्येन्द्र तिवारी ने एपोलिपोप्रोटीन और लिपोप्रोटीन (ए) जैसे हृदय रोग के महत्वपूर्ण जोखिम कारकों की जानकारी दी। वहीं, डॉ. रूपाली खन्ना ने घर पर नियमित रक्तचाप जांच और 24 घंटे की एम्बुलेटरी ब्लड प्रेशर मॉनिटरिंग की उपयोगिता समझाई। उन्होंने बताया कि केवल अस्पताल में बढ़े रक्तचाप के आधार पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है, क्योंकि कुछ लोगों में ‘व्हाइट कोट हाइपरटेंशन’ की स्थिति हो सकती है।

डॉ. नकुल सिन्हा ने अनियंत्रित उच्च रक्तचाप के प्रबंधन पर चर्चा की, जबकि केजीएमयू के डॉ. अक्षय प्रधान ने खराब कोलेस्ट्रॉल यानी एलडीएल को नियंत्रित रखने के महत्व पर प्रकाश डाला। सीएसआई उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष डॉ. उमेश्वर पाण्डेय ने ‘140/90 सामान्य नहीं है’ विषय के माध्यम से उच्च रक्तचाप को गंभीरता से लेने की अपील की।

युवाओं में हार्ट अटैक चिंता का विषय

विशेषज्ञों ने मोटापा, अधिक नमक का सेवन, उच्च रक्तचाप, वायु प्रदूषण और नींद संबंधी समस्याओं को हृदय स्वास्थ्य के लिए प्रमुख चुनौतियां बताया। युवाओं में बढ़ते हार्ट अटैक, जिम और मैराथन के दौरान अचानक होने वाली मौतों तथा बच्चों में रूमेटिक हृदय रोग की रोकथाम पर भी चर्चा हुई।

एसजीपीजीआईएमएस के डॉ. नवीन गर्ग ने हृदय विफलता के आधुनिक उपचारों की जानकारी दी। नई दिल्ली के आरएमएल अस्पताल के डॉ. पुनीत अग्रवाल ने मोटापे और हृदय रोग के संबंध तथा जीएलपी-1 श्रेणी की दवाओं पर व्याख्यान दिया। विशेषज्ञों ने हार्ट अटैक के बाद कार्डियक रिहैबिलिटेशन को उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए इसके सीमित इस्तेमाल पर चिंता जताई।

समय पर जांच से कम हो सकता है जोखिम

सम्मेलन के आयोजन सचिव प्रो. डॉ. अवधेश शर्मा ने कहा कि भारत में हृदय रोग कम उम्र में और अधिक गंभीर रूप में सामने आ रहे हैं। रक्तचाप, रक्त शर्करा और कोलेस्ट्रॉल की समय पर जांच के साथ स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

कार्यक्रम में डॉ. राकेश वर्मा, डॉ. संतोष सिन्हा, डॉ. एम.एम. रज़ी, डॉ. मोहित सचान और डॉ. मुकेश झा सहित कई वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ उपस्थित रहे।