सेकेंडरी स्टील उद्योग की GST व्यवस्था सरल करने की मांग
Secondary steel industry seeks simplification of GST regime

मंडी गोबिंदगढ़: पंजाब के पूर्व विशेष मुख्य सचिव एवं वित्त आयुक्त (राजस्व) केबीएस सिद्धू ने कबाड़ आधारित सेकेंडरी स्टील उद्योग की जीएसटी व्यवस्था को सरल बनाने की मांग की है। उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री एवं जीएसटी परिषद की अध्यक्ष निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर इस क्षेत्र की कर संबंधी समस्याओं की समीक्षा करने और व्यावहारिक समाधान तलाशने का आग्रह किया है।

मंडी गोबिंदगढ़ और खन्ना के उद्योग प्रतिनिधियों के साथ चर्चा के बाद लिखे गए पत्र में सिद्धू ने कहा कि सेकेंडरी स्टील उद्योग की कार्यप्रणाली एकीकृत स्टील संयंत्रों से अलग है। मंडी गोबिंदगढ़, खन्ना और लुधियाना में संचालित इंडक्शन भट्टियों तथा री-रोलिंग मिलों में बड़े पैमाने पर कबाड़ का इस्तेमाल किया जाता है। यह कबाड़ घर-घर से संग्रह करने वालों, कबाड़ियों, व्यापारियों और अन्य बिचौलियों के माध्यम से निर्माताओं तक पहुंचता है।

GNSU Admission Open 2026

फर्जी बिलिंग रोकने पर जोर

सिद्धू ने कहा कि कबाड़ की लंबी आपूर्ति शृंखला में फर्जी फर्मों के जरिए बिलिंग और कर चोरी की आशंका बनी रहती है। कई मामलों में आपूर्तिकर्ता की ओर से कर जमा नहीं करने पर वसूली का बोझ अंतिम स्तर पर मौजूद निर्माता पर पड़ जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फर्जी बिलिंग करने वालों के प्रति नरमी बरतना उनका उद्देश्य नहीं है, बल्कि ऐसी गड़बड़ियों को बढ़ावा देने वाली व्यवस्था की खामियों को दूर करना जरूरी है।

पत्र में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के एक अक्टूबर 2026 के फैसले का भी उल्लेख किया गया है। सिद्धू के अनुसार, फैसले में जीएसटी परिषद और सरकार के विचारार्थ आपूर्तिकर्ताओं के पंजीकरण में कड़ी जांच, पंजीकरण रद्द होने पर खरीदारों को सूचना, कर भुगतान का वास्तविक समय में सत्यापन तथा असंगठित क्षेत्र से खरीदे गए कबाड़ पर रिवर्स चार्ज व्यवस्था जैसे उपाय सुझाए गए हैं।

उद्योग के लिए वैकल्पिक उपाय

सिद्धू ने कबाड़ की पूरी आपूर्ति शृंखला पर रिवर्स चार्ज लागू करने, कबाड़ और सेकेंडरी स्टील पर जीएसटी दर घटाने, इनपुट टैक्स क्रेडिट के उपयोग को सीमित चरणों तक रखने तथा तकनीक आधारित सत्यापन व्यवस्था विकसित करने जैसे विकल्प भी प्रस्तुत किए। हालांकि, उन्होंने किसी एक विकल्प को अंतिम समाधान नहीं बताया और राजस्व पर उसके प्रभाव का आकलन जीएसटी परिषद पर छोड़ा।

उन्होंने इस विषय पर अध्ययन के लिए मंत्रियों का समूह गठित करने या फिटमेंट समिति अथवा अधिकारियों की समिति को जिम्मेदारी सौंपने का सुझाव दिया। साथ ही, संबंधित राज्यों और उद्योग प्रतिनिधियों को प्रक्रिया में शामिल करने की बात कही।

सिद्धू ने कहा कि पंजाब में रोजगार उपलब्ध कराने और कबाड़ के पुनर्चक्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले इस उद्योग के लिए ऐसी कर व्यवस्था जरूरी है, जिससे ईमानदार निर्माताओं को बिचौलियों की कर चोरी का खामियाजा न भुगतना पड़े और धोखाधड़ी करने वालों को अनुचित लाभ न मिले।