
चंडीगढ़: प्रस्तावित राष्ट्रीय इस्पात नीति ‘विजन 2047’ के मसौदे में पंजाब और उसके प्रमुख इस्पात औद्योगिक केंद्रों मंडी गोबिंदगढ़ तथा लुधियाना का उल्लेख नहीं होने पर सवाल उठाए गए हैं। पंजाब के पूर्व विशेष सचिव एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी केबीएस सिद्धू ने केंद्रीय इस्पात मंत्रालय को सुझाव भेजकर राज्य के सेकेंडरी स्टील उद्योग के लिए विशेष संक्रमण योजना, आधुनिक सुविधाओं और बेहतर माल ढुलाई व्यवस्था विकसित करने की मांग की है।
सिद्धू ने अपने पत्र में कहा कि इस्पात मंत्रालय ने 11 अक्टूबर को नीति का मसौदा सार्वजनिक कर 30 अक्टूबर तक सुझाव आमंत्रित किए हैं। मसौदे में वर्ष 2047 तक भारत की कच्चे इस्पात की उत्पादन क्षमता बढ़ाकर 60.4 करोड़ टन सालाना करने और प्रति व्यक्ति इस्पात खपत 116 किलोग्राम से बढ़ाकर 302 किलोग्राम करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने सुझाव दिया कि कच्चे माल की उपलब्धता, आयात-निर्यात और दीर्घकालिक निवेश से जुड़े लक्ष्यों को अधिक स्पष्ट किया जाना चाहिए।
सेकेंडरी स्टील उद्योग के लिए विशेष योजना की मांग
सिद्धू के अनुसार, मंडी गोबिंदगढ़, खन्ना और लुधियाना का औद्योगिक क्षेत्र मुख्य रूप से इंडक्शन फर्नेस और री-रोलिंग मिलों पर निर्भर है। नीति के मसौदे में इंडक्शन फर्नेस की हिस्सेदारी मौजूदा लगभग 38 प्रतिशत से घटाकर 2047 तक 15 प्रतिशत करने की परिकल्पना है, लेकिन इसके लिए स्पष्ट संक्रमण योजना, आधुनिकीकरण की समय-सीमा और औद्योगिक क्लस्टर कार्यक्रम का अभाव है।
उन्होंने लुधियाना के हाई-टेक वैली में टाटा स्टील के स्क्रैप आधारित इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस संयंत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसी आधुनिक तकनीकों और पारंपरिक औद्योगिक इकाइयों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। उनके मुताबिक, यह संयंत्र सालाना 7.50 लाख टन उत्पादन क्षमता वाला है और इसका निर्धारित कार्बन उत्सर्जन प्रति टन इस्पात 0.3 टन से कम है।
आधुनिक सुविधाओं और बेहतर परिवहन पर जोर
सिद्धू ने मंडी गोबिंदगढ़ स्थित राष्ट्रीय सेकेंडरी स्टील प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईएसएसटी) को उत्तरी भारत के लिए उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित करने का सुझाव दिया। उन्होंने साझा सुविधाओं वाला पायलट औद्योगिक क्लस्टर स्थापित करने, छोटे उद्योगों को उपयुक्त आकार में स्क्रैप उपलब्ध कराने और पेलेट तथा स्पंज आयरन की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की।
इसके अलावा, उन्होंने लुधियाना में पूर्वी समर्पित माल ढुलाई गलियारे से जुड़ा इस्पात टर्मिनल बनाने, हरित इस्पात प्रमाणन की व्यवस्था विकसित करने और यूरोपीय संघ के कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (सीबीएएम) से निपटने में निर्यातकों की सहायता करने का सुझाव दिया।
सिद्धू ने कहा कि पंजाब में लौह अयस्क और कोयले के पर्याप्त स्थानीय संसाधन तथा सार्वजनिक क्षेत्र का इस्पात संयंत्र नहीं होने के बावजूद निजी उद्यम और कुशल श्रमिकों ने उद्योग को आगे बढ़ाया है। उन्होंने मंत्रालय से नीति को अंतिम रूप देने से पहले चंडीगढ़ या मंडी गोबिंदगढ़ में उद्योग प्रतिनिधियों के साथ परामर्श बैठक आयोजित करने का आग्रह किया।






