स्टारलिंक और रिलायंस में सैटेलाइट इंटरनेट को लेकर तकरार तेज
Tussle between Starlink and Reliance over satellite internet intensifies

नयी दिल्ली: भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं की शुरुआत को लेकर रिलायंस इंडस्ट्रीज और एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। रिलायंस के बयान के बाद स्टारलिंक ने भारत में अपनी तैयारियों का जिक्र करते हुए कहा है कि वह देश में हाई-स्पीड इंटरनेट सेवा उपलब्ध कराने के लिए तैयार है। इस विवाद में एलन मस्क ने भी रिलायंस प्रमुख मुकेश अंबानी की बाजार में स्थिति और प्रतिस्पर्धा को लेकर सवाल उठाए हैं।

स्टारलिंक ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपने आधिकारिक अकाउंट से कहा कि कंपनी पिछले पांच वर्षों से अधिक समय से भारत में नियामकों, उद्योग जगत और दूरसंचार ऑपरेटरों के साथ मिलकर काम कर रही है। कंपनी के मुताबिक, भारतीय ग्राहकों को सुरक्षित और भरोसेमंद सेवा देने के लिए देश में समर्पित सिस्टम, गेटवे और अन्य जरूरी बुनियादी ढांचा तैयार किया गया है। स्टारलिंक ने यह भी कहा कि उसकी सेवाएं आवश्यक सरकारी मंजूरियों के अनुरूप शुरू की जाएंगी।

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इससे पहले रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपने बयान में कहा था कि भारत की दूरसंचार नीति सभी कंपनियों के लिए समान नियमों और प्रक्रियाओं पर आधारित होनी चाहिए। कंपनी ने स्पष्ट किया कि वह प्रतिस्पर्धा से पीछे हटने वाली नहीं है और सैटेलाइट संचार के क्षेत्र में भी मुकाबले का स्वागत करती है। रिलायंस के अनुसार, उसकी दूरसंचार इकाई जियो ने वर्ष 2016 में बाजार में प्रवेश किया था और अब उसके 53 करोड़ से अधिक ग्राहक हैं। कंपनी ने कहा कि भारत में कारोबार करने वाली सभी कंपनियों को देश के कानूनों और नीतियों का पालन करना होगा। रिलायंस ने यह भी बताया कि जियो की सैटेलाइट सेवाएं आवश्यक मंजूरियों की प्रतीक्षा कर रही हैं।

वहीं, एलन मस्क ने एक्स पर पोस्ट कर भारत में प्रतिस्पर्धा को लेकर रिलायंस समर्थकों के तर्कों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एक ओर स्टारलिंक की कीमतों को लेकर चिंता जताई जा रही है, तो दूसरी ओर उसे मजबूत प्रतिस्पर्धी भी बताया जा रहा है। मस्क के मुताबिक, बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने से भारतीय उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प मिलेंगे, जबकि इससे रिलायंस के मुनाफे पर असर पड़ सकता है।

इससे पहले मस्क भारतीय दूरसंचार क्षेत्र में कथित एकाधिकार संबंधी प्रथाओं और स्टारलिंक की व्यावसायिक शुरुआत में नियामकीय बाधाओं को लेकर भी सवाल उठा चुके हैं।

भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं का विस्तार अब सरकारी मंजूरियों, नियामकीय शर्तों और कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा पर निर्भर करेगा। इस क्षेत्र में नई सेवाओं की शुरुआत से दूरदराज के इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी बढ़ने की संभावनाएं भी जुड़ी हैं।