चंडीगढ़। भारतीय पुरुष हॉकी टीम के एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने के बाद कप्तान हरमनप्रीत सिंह के पिता सरबजीत सिंह ने इस सफलता को पूरी टीम की मेहनत का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि किसी एक खिलाड़ी की नहीं, बल्कि सभी खिलाड़ियों के सामूहिक प्रयास का नतीजा है।
भारत ने जापान में खेले गए फाइनल में मलेशिया को 5-1 से हराकर पुरुष हॉकी का स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस जीत के साथ भारतीय टीम ने लॉस एंजिल्स ओलंपिक के लिए सीधे क्वालीफाई भी कर लिया। कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने फाइनल में दो गोल किए और टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई। इनमें पेनल्टी कॉर्नर के जरिए किया गया भारत का पहला गोल भी शामिल रहा।
सरबजीत सिंह ने हरमनप्रीत के चर्चित निकनेम ‘सरपंच’ का जिक्र करते हुए कहा कि यह केवल उनके बेटे की जीत नहीं है। हॉकी टीम गेम है और हर खिलाड़ी का योगदान महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि टीम के सभी खिलाड़ी उनके लिए अपने बच्चों की तरह हैं और इस ऐतिहासिक सफलता में प्रत्येक सदस्य की मेहनत शामिल है।
अमृतसर के पास किसान परिवार से आने वाले सरबजीत ने कहा कि गांव की साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर अपने बेटे को भारतीय टीम की कप्तानी करते देखना उनके लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने कहा कि एक गांव की मिट्टी से निकला बच्चा देश का नेतृत्व करने के मुकाम तक पहुंचा, यह पूरे परिवार के लिए बड़ी उपलब्धि है।
उन्होंने भारतीय महिला हॉकी टीम की सफलता पर भी खुशी जताई। महिला टीम ने फाइनल में चीन को हराकर स्वर्ण पदक जीता था। इस तरह भारतीय पुरुष और महिला दोनों टीमों ने एक ही एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक हासिल किया। दोनों टीमों की सफलता और ओलंपिक में जगह पक्की होने से भारतीय हॉकी के लिए यह उपलब्धि और खास बन गई है।
सरबजीत ने हरमनप्रीत के सफर का श्रेय परिवार की आस्था और गुरु की कृपा को भी दिया। उन्होंने बताया कि फाइनल के बाद तत्काल बेटे से बातचीत नहीं हो सकी। हरमनप्रीत के अमृतसर लौटने के बाद परिवार और ग्रामीण मिलकर उनकी उपलब्धि का जश्न मनाने की तैयारी करेंगे।







