पटना। बिहार में गंडक नदी का जलस्तर अब तक के सर्वोच्च बाढ़ स्तर से 22 सेंटीमीटर ऊपर पहुंचने से बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है। नदी के बढ़े जलदबाव के कारण सारण और मुजफ्फरपुर जिलों में तटबंधों की सुरक्षा प्रभावित हुई है। हालांकि जलस्तर में गिरावट के शुरुआती संकेत मिलने से कुछ राहत की उम्मीद जगी है, लेकिन अगले 48 घंटे स्थिति संवेदनशील बनी रहने की आशंका है।
जल संसाधन विभाग की गंडक फ्लैश फ्लड रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल और उत्तर प्रदेश में हुई भारी बारिश के बाद गंडक के जलस्तर में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की गई। गोपालगंज के डुमरियाघाट में करीब 36 घंटे से, जबकि सारण के रेवाघाट और वैशाली के लालगंज में लगभग 21 घंटे से नदी का जलस्तर ऐतिहासिक उच्चतम बाढ़ स्तर से ऊपर बना हुआ है।
गंडक के बढ़े जलस्तर से उसके दोनों तटबंधों पर अत्यधिक दबाव बना हुआ है। इसके अलावा गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर रहने के कारण गंडक में बैकफ्लो का दबाव भी बढ़ गया है। दोहरे जलदबाव के चलते कई संवेदनशील स्थानों पर सीपेज और पाइपिंग की स्थिति सामने आई है।
विभागीय अभियंताओं और कर्मियों को संवेदनशील स्थलों पर लगातार निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। तटबंधों की सुरक्षा के लिए विभिन्न स्थानों पर सघन बाढ़ संघर्षात्मक कार्य चलाया जा रहा है।
विभाग के मुताबिक, सारण जिले के पानापुर प्रखंड में राइट सारण तटबंध में कटाव के कारण ब्रिच की स्थिति बनी है। वहीं मुजफ्फरपुर के साहेबगंज प्रखंड में तिरहुत मुख्य तटबंध के तहत एक रिंग बांध में भी कटाव के बाद टूट हुई है। इन घटनाओं के बाद प्रशासन और जल संसाधन विभाग की चुनौती बढ़ गई है।
हालांकि विभाग ने बताया कि अन्य संवेदनशील स्थलों की स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है और वहां लगातार निगरानी के साथ सुरक्षा कार्य जारी है। नदी के जलस्तर में गिरावट शुरू होने के बावजूद प्रभावित क्षेत्रों में सतर्कता बरती जा रही है।







