
सासाराम। सरकारी कार्यालयों को साफ-सुथरा रखने की जिम्मेदारी निभाने वाली सफाई कर्मियों की आर्थिक स्थिति बेहद कठिन बनी हुई है। सासाराम प्रखंड और अंचल कार्यालय परिसर में सफाई का काम करने वाली महिलाओं का कहना है कि उन्हें महीने में महज छह हजार रुपये मानदेय मिलता है। इसमें आने-जाने का खर्च निकालने के बाद परिवार के भरण-पोषण के लिए बहुत कम राशि बचती है।
सफाई कर्मियों के अनुसार, वे प्रतिदिन सुबह से शाम तक झाड़ू लगाने और कार्यालय परिसर की सफाई करने में जुटी रहती हैं। इसके बावजूद मिलने वाला मानदेय उनकी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है। उनका कहना है कि आने-जाने में ही प्रतिमाह करीब दो हजार रुपये खर्च हो जाते हैं। इस तरह छह हजार रुपये में से लगभग चार हजार रुपये ही परिवार के अन्य खर्चों के लिए बचते हैं।
इसी सीमित राशि से बच्चों की पढ़ाई, घर का राशन, दवाइयां और अन्य जरूरी खर्च पूरे करने पड़ते हैं। सफाई कर्मियों का कहना है कि लगातार मेहनत करने के बावजूद आर्थिक स्थिति में सुधार नहीं हो पा रहा है।
सफाई कार्य में लगी महिलाओं ने बताया कि वे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आती हैं। कई परिवारों के पास अपनी जमीन तक नहीं है। ऐसे में कम मानदेय के कारण रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना और परिवार के भविष्य की चिंता करना उनके लिए चुनौती बना हुआ है।
महिलाओं ने सरकार और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से सफाई कर्मियों को उचित मानदेय देने की मांग की है। उनका कहना है कि सफाई कार्य को नियमित रूप से करने वाले कर्मियों को उनकी मेहनत के अनुरूप पारिश्रमिक मिलना चाहिए, ताकि वे सम्मानजनक तरीके से अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकें।
इसके साथ ही उन्होंने सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई है। सफाई कर्मियों ने सरकार से कम से कम पांच डिसमिल जमीन उपलब्ध कराने की अपील की है, ताकि उनके परिवारों को रहने के लिए अपना आशियाना मिल सके।
महिलाओं का कहना है कि सरकारी कार्यालयों की स्वच्छता बनाए रखने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में उनके मानदेय, सामाजिक सुरक्षा और आवास संबंधी समस्याओं पर प्रशासन को गंभीरता से विचार करना चाहिए।






