बर्लिन: जर्मनी के सैक्सोनी-अनहाल्ट राज्य में 6 सितंबर को हुए विधानसभा चुनाव ने देश की राजनीति में बड़ा बदलाव ला दिया है। दक्षिणपंथी पार्टी अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (AfD) ने 43.8 प्रतिशत वोट हासिल कर 83 सदस्यीय विधानसभा में 39 सीटें जीत लीं। पार्टी बहुमत के लिए जरूरी 42 सीटों से केवल तीन कदम दूर रह गई।
इस नतीजे ने चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की पार्टी CDU को बड़ा झटका दिया है। CDU को सिर्फ 17.2 प्रतिशत वोट और 15 सीटें मिलीं। 2021 में पार्टी के पास 40 सीटें थीं। SPD, ग्रीन्स और लेफ्ट पार्टी को आठ-आठ सीटें मिलीं, जबकि BSW ने पांच सीटों के साथ विधानसभा में प्रवेश किया।
कौन हैं उलरिष जिगमुंड?
AfD की इस बड़ी जीत के केंद्र में 35 वर्षीय उलरिष जिगमुंड हैं। करीब एक दशक से राज्य की राजनीति में सक्रिय जिगमुंड ने खुद को पार्टी के कुछ अन्य नेताओं की तुलना में अपेक्षाकृत नरम और आम लोगों से जुड़ा चेहरा पेश किया। सोशल मीडिया पर उनकी मजबूत पकड़ ने भी चुनाव अभियान में उनकी लोकप्रियता बढ़ाई।
जिगमुंड के चुनावी अभियान में अवैध प्रवासन, सुरक्षा और सरकार की मौजूदा नीतियों के खिलाफ नाराजगी जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। AfD ने इन्हीं मुद्दों को लेकर मतदाताओं के बीच समर्थन जुटाया। जिगमुंड ने नतीजों के बाद कहा कि मतदाताओं ने बदलाव का स्पष्ट संदेश दिया है।
पहली बार सत्ता के करीब AfD
सैक्सोनी-अनहाल्ट का नतीजा इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार AfD किसी जर्मन राज्य में सरकार बनाने की स्थिति के बेहद करीब पहुंची है। हालांकि पार्टी के पास अभी अपने दम पर बहुमत नहीं है और अन्य प्रमुख दल AfD के साथ सहयोग से इनकार कर रहे हैं।
AfD की रूस समर्थक और कड़े प्रवासन विरोधी रुख को लेकर यूरोप में भी चिंता बढ़ी है। पार्टी की सफलता को लेकर फ्रांस समेत कई यूरोपीय नेताओं ने इसे गंभीर राजनीतिक संकेत बताया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी चुनाव परिणाम पर प्रतिक्रिया दी और AfD की जीत को जर्मनी की प्रवासन नीतियों से जोड़कर देखा।
यह चुनाव सिर्फ सैक्सोनी-अनहाल्ट की सत्ता का सवाल नहीं है। परिणाम ने जर्मनी के पूर्वी हिस्से में पारंपरिक दलों के प्रति बढ़ती नाराजगी और AfD के विस्तार को उजागर किया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह जीत AfD को राज्य की सत्ता तक पहुंचाती है और इसका असर आने वाले जर्मन चुनावों पर कितना पड़ता है।








