मुंबई: शाहरुख खान स्टारर फिल्म ‘जवान’ को रिलीज हुए तीन साल बीत चुके हैं, लेकिन फिल्म का प्रभाव आज भी भारतीय सिनेमा में महसूस किया जाता है। एटली के निर्देशन में बनी इस फिल्म ने न सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर शानदार सफलता हासिल की, बल्कि इसे एक बड़े सिनेमाई इवेंट के रूप में भी पहचान मिली।
‘जवान’ के जरिए एटली ने हिंदी सिनेमा में अपना निर्देशन डेब्यू किया। उन्होंने अपनी खास लार्जर-दैन-लाइफ मास एंटरटेनमेंट शैली को हिंदी दर्शकों के सामने पेश किया। फिल्म में जबरदस्त एक्शन, इमोशन, ड्रामा, संगीत और सामाजिक मुद्दों का ऐसा मेल देखने को मिला, जिसने इसे हर वर्ग के दर्शकों से जोड़ दिया।
फिल्म में शाहरुख खान ने डबल रोल निभाकर दर्शकों का खास ध्यान खींचा। दोनों किरदारों की अलग-अलग शख्सियत और उनके बीच का भावनात्मक जुड़ाव फिल्म की कहानी का अहम हिस्सा रहा। एक्शन सीक्वेंस से लेकर इमोशनल दृश्यों तक शाहरुख के अभिनय की खूब चर्चा हुई।
‘जवान’ की खासियत यह भी रही कि फिल्म ने भाषाई और क्षेत्रीय सीमाओं को काफी हद तक पार किया। हिंदी के साथ दक्षिण भारतीय दर्शकों के बीच भी फिल्म को जबरदस्त लोकप्रियता मिली। एटली की शैली और शाहरुख की स्टार पावर ने मिलकर इसे देशभर में बड़े पैमाने पर दर्शकों तक पहुंचाया।
तीन साल बाद भी ‘जवान’ को हिंदी सिनेमा के उन महत्वपूर्ण पड़ावों में गिना जाता है, जिसने मास एंटरटेनमेंट की ताकत को नए स्तर पर पहुंचाया। फिल्म ने यह दिखाया कि दमदार कहानी, भव्य प्रस्तुति और मजबूत स्टार अपील का संयोजन दर्शकों को बड़े पैमाने पर सिनेमाघरों तक खींच सकता है।
यही वजह है कि ‘जवान’ आज भी शाहरुख खान और एटली के करियर की चर्चित फिल्मों में शामिल है और भारतीय मास सिनेमा के बदलते स्वरूप की एक महत्वपूर्ण मिसाल बनी हुई है।








