Shri Krishna Janmotsav will be celebrated in Mathura on September 4, a grand event with the pledge of 'cow protection and national protection'.

मथुरा: श्रीकृष्ण जन्मभूमि की नगरी मथुरा में इस वर्ष श्रीकृष्ण जन्मोत्सव 4 सितंबर को भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर मध्यरात्रि में मनाया जाएगा। श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर स्थित भागवत भवन सहित सभी प्रमुख मंदिरों में जन्माष्टमी को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं। इस बार महापर्व का आयोजन ‘गौरक्षा-राष्ट्र रक्षा’ के संकल्प के साथ किया जा रहा है।

श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा और सदस्य गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी के अनुसार, जन्मोत्सव के दौरान महाभिषेक के बाद ठाकुरजी भागवत भवन स्थित राधाकृष्ण मंदिर में विशेष रूप से तैयार ‘पंचरत्नी’ पोशाक धारण कर कलहंस पुष्प बंगले में विराजेंगे। इस पोशाक में कामधेनु गाय, पांचजन्य शंख, अमृत कलश, ऐरावत हाथी और कल्पवृक्ष को पंचरत्नों के रूप में दर्शाया गया है।

GNSU Admission Open 2026

भव्य सजावट और रोशनी से सजेगा जन्मस्थान परिसर

जन्माष्टमी के लिए श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर को आकर्षक रोशनी और विशेष सजावट से सजाया जा रहा है। मंदिर के बाहरी हिस्से, प्रकाश शिखर और पूरे परिसर को भव्य स्वरूप दिया जा रहा है। ठाकुरजी के श्रृंगार में रत्न-जड़ित मुकुट, बांसुरी और नवरत्न-जड़ित कंठा समेत विभिन्न आभूषण शामिल होंगे। वहीं, भगवती योगमायाजी को विशेष दिव्य स्वर्ण मुकुट धारण कराया जाएगा।

संस्थान के मुताबिक, ठाकुर केशवदेव, मां योगमाया, गर्भगृह और राधाकृष्ण युगल सरकार मंदिर में विशेष पूजन, सहस्रार्चन, जन्माभिषेक और आरती के दर्शन श्रद्धालुओं को होंगे।

3 सितंबर को निकलेगी पोशाक की शोभायात्रा

‘पंचरत्नी’ पोशाक 3 सितंबर को शाम करीब 5:30 बजे भव्य शोभायात्रा के साथ श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर में लाई जाएगी। इस दौरान काशी विश्वनाथ धाम से प्राप्त प्रसाद और सुगंधित द्रव्य तथा अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र से प्राप्त उपहार एवं अभिषेक सामग्री भी प्रदर्शित की जाएगी।

गर्भगृह को भी विशेष रूप से सजाया जा रहा है। संस्थान के अनुसार, गर्भगृह के चबूतरे और दीवारों को आकर्षक स्वरूप देने में करीब 200 किलोग्राम चांदी का इस्तेमाल किया गया है। इस वर्ष नवनिर्मित रजत कमल में विराजमान श्रीगोपालजी का जन्माभिषेक भी प्रमुख आकर्षण रहेगा।

आधी रात को होगा भगवान का प्राकट्य

जन्मोत्सव कार्यक्रम की शुरुआत 4 सितंबर को सुबह 5:30 बजे मंगला आरती से होगी। इसके बाद सुबह 8 बजे पंचामृत अभिषेक, पुष्पार्चन और भजन-गायन का आयोजन किया जाएगा।

जन्म महाभिषेक का मुख्य कार्यक्रम रात 10 बजे श्रीगणेश-नवग्रह पूजन से शुरू होगा। इसके बाद 1008 कमल-पुष्पों से सहस्रार्चन किया जाएगा। मध्यरात्रि ठीक 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य के साथ मंदिर परिसर ढोल-नगाड़ों, झांझ-मंजीरों और मृदंग की ध्वनि से गूंज उठेगा। इसी समय जन्म महाआरती शुरू होगी, जो करीब 12:10 बजे तक चलेगी।

इसके बाद भगवान के चल विग्रह का सुगंधित द्रव्यों से अभिषेक किया जाएगा। जन्माभिषेक के बाद रात 12:45 से 12:50 बजे तक शृंगार आरती होगी।

श्रद्धालुओं के प्रवेश और निकासी की व्यवस्था

जन्माष्टमी के दिन श्रद्धालुओं का प्रवेश पूर्व की तरह उत्तरी द्वार (गोविंद नगर की ओर) से होगा, जबकि निकासी दक्षिणी द्वार (मुख्य द्वार) से कराई जाएगी।

इसके अलावा 1 से 5 सितंबर तक श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर के लीलामंच पर शाम 7 बजे से रात 9 बजे तक विभिन्न धार्मिक लीलाओं का मंचन होगा। इनमें ‘माखन चोर गोपाल लीला’, ‘मीरा बाई चरित्र लीला’, ‘श्यामा-श्याम मिलन लीला’, ‘श्रीकृष्ण जन्म लीला’ और ‘गिरिराज पूजा व छप्पनभोग दर्शन’ प्रमुख हैं।