Kerala's traditional arts were showcased during Onam week; Margi Usha's Nangyarkoothu captivated the audience.

तिरुवनंतपुरम: केरल पर्यटन विभाग की ओर से आयोजित ओणम सप्ताह समारोह में राज्य की समृद्ध पारंपरिक कलाओं की शानदार झलक देखने को मिल रही है। तिरुवनंतपुरम के कनककुन्नु महल में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में विदेशी पर्यटकों समेत बड़ी संख्या में दर्शक पहुंच रहे हैं।

औपनिवेशिक काल के इस ऐतिहासिक महल में कुडियाट्टम, कथकली, नंग्यारकूथु, चाक्यारकूथु और अक्षराश्लोक सद जैसी पारंपरिक प्रस्तुतियां आयोजित की जा रही हैं। रविवार से शुरू हुए सप्ताहभर के इस उत्सव में हर दिन शाम चार बजे कलाकार अपनी प्रस्तुतियों के जरिए दर्शकों को केरल की सांस्कृतिक विरासत से रूबरू करा रहे हैं।

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शुक्रवार को प्रसिद्ध कलाकार मार्गी उषा ने ‘वामनावतारम’ पर आधारित नंग्यारकूथु की प्रस्तुति दी। खचाखच भरे हॉल में मौजूद दर्शक उनकी प्रस्तुति से मंत्रमुग्ध नजर आए। करीब छह दशक से प्रदर्शन कला के क्षेत्र में सक्रिय उषा ने भारत के साथ-साथ विदेशों में भी कुडियाट्टम की प्रस्तुतियां दी हैं। पारंपरिक कला में उनके योगदान के लिए उन्हें कई सम्मान मिल चुके हैं। वर्तमान में वह तिरुवनंतपुरम स्थित कुडियाट्टम-नंग्यारकूथु स्कूल में प्रशिक्षण दे रही हैं।

केरल के पर्यटन, सिनेमा और संस्कृति मंत्री पी.सी. विष्णुनाथ ने कहा कि इन कार्यक्रमों का उद्देश्य राज्य की पारंपरिक और अनुष्ठानिक कलाओं को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को इन कला रूपों से परिचित कराना बेहद जरूरी है और ओणम समारोह इसके लिए प्रभावी मंच साबित हो रहा है।

मंत्री ने कहा कि सरकार पारंपरिक कलाओं के लिए अधिक मंच उपलब्ध कराने के साथ-साथ इन कठिन कला विधाओं को लंबे समय से समर्पित कलाकारों को सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है।

मार्गी उषा ने कुडियाट्टम को केरल की पारंपरिक कलाओं का मूल स्रोत बताते हुए पर्यटन विभाग के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि महल जैसे ऐतिहासिक स्थल पर इन प्रस्तुतियों के लिए मंच उपलब्ध कराना पारंपरिक कला के लिए सम्मान की बात है।