
चेन्नई: तमिलनाडु में चेन्नई की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) अदालत ने वर्ष 2010 के 2.39 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी मामले में बैंक ऑफ़ इंडिया के पूर्व डिप्टी जनरल मैनेजर समेत छह आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उन्हें दस साल कठोर कारावास की सज़ा सुनाई है। दोषी ठहराए गए लोगों में चार सरकारी कर्मचारी शामिल हैं। इन लोगों के नाम एन. वेंकटाचलम (तत्कालीन डीजीएम), एम. शिवकुमार (रिकॉर्ड क्लर्क), टी. दशरथन, एम. मनिचावेलु और दो निजी व्यक्ति, सुश्री ओ पी थमारई पू और पी. थंडापानी है। अदालत ने इन लोगों पर कुल 2.70 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
सीबीआई ने 19 मई, 2010 को बैंक की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि मुख्य आरोपी ई. मुथुस्वामी और अन्य लोगों ने बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर फंड का गबन किया और झूठे तथा जाली दस्तावेज़ जमा कर बेईमानी और धोखाधड़ी से कई क्रेडिट सुविधाएँ हासिल कीं, जिससे बैंक को 238.97 लाख रुपये का चूना लगा।
जांच पूरी होने के बाद, सीबीआई ने 28 दिसंबर, 2011 को 12 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। इनमें पांच सरकारी कर्मचारी और सात निजी व्यक्ति शामिल थे। सुनवाई के बाद, अदालत ने छह आरोपियों को दोषी ठहराया और सज़ा सुनाई।
एक सरकारी कर्मचारी वी . उमापति के खिलाफ मामले को अलग कर दिया गया है। चार निजी आरोपी – ई. मुथुसामी, ए. विंसेंट, के. श्रीकांत और सुश्री एम. ज्योति की मौत हो गई और उनके खिलाफ आरोप खत्म कर दिए गए। एक आरोपी सुश्री. लावण्या को बरी कर दिया गया है।






