बैतूल: मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में वर्षा ऋतु के दौरान जलजनित और मच्छरजनित बीमारियों के बढ़ते खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों के लिए विस्तृत एडवाइजरी जारी की है। विभाग ने लोगों से स्वच्छता अपनाने, शुद्ध पेयजल का उपयोग करने तथा बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज कुमार हुरमाड़े ने बताया कि बारिश के मौसम में दूषित पानी के सेवन से डायरिया, पेचिश, हैजा, टाइफाइड और पीलिया जैसी बीमारियां तेजी से फैलती हैं। उन्होंने कहा कि इनसे बचाव के लिए केवल उबला अथवा शुद्ध पेयजल का उपयोग करें, भोजन से पहले और शौच के बाद साबुन से हाथ धोएं तथा खुले में शौच से बचें।
उन्होंने बताया कि दूषित पानी से होने वाला दस्त रोग बच्चों के लिए अधिक गंभीर हो सकता है। ऐसे मामलों में शरीर में पानी की कमी होने पर स्थिति गंभीर बन सकती है। उन्होंने दस्त होने पर चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार ओआरएस घोल और जिंक की गोली लेने की सलाह दी। साथ ही सड़े-गले खाद्य पदार्थों से परहेज, भोजन को ढककर रखने तथा फल एवं सब्जियों को अच्छी तरह धोकर उपयोग करने की अपील की।
स्वास्थ्य विभाग ने मलेरिया और डेंगू की रोकथाम के लिए घर और आसपास पानी जमा नहीं होने देने पर विशेष जोर दिया है। कूलर, फूलदान, फ्रिज की ट्रे और अन्य जल पात्रों की सप्ताह में कम से कम एक बार सफाई करने, रुके हुए पानी में आवश्यकतानुसार तेल डालने, मच्छरदानी का उपयोग करने तथा कीटनाशक का छिड़काव कराने की सलाह दी गई है। बुखार आने पर तत्काल रक्त जांच कराकर चिकित्सकीय उपचार लेने को कहा गया है।
एडवाइजरी में वर्षाकाल में सर्पदंश की घटनाओं को लेकर भी सतर्क रहने की अपील की गई है। लोगों से अंधेरे में नंगे पैर नहीं चलने, जूते पहनने से पहले उन्हें अच्छी तरह झाड़ने तथा सांप के काटने पर घायल व्यक्ति को बिना घबराए स्थिर रखकर तुरंत निकटतम अस्पताल पहुंचाने की सलाह दी गई है। घाव पर चीरा लगाने, मालिश करने अथवा घरेलू उपचार करने से बचने को कहा गया है।
इसके अलावा आंखों के संक्रमण से बचाव के लिए संक्रमित व्यक्ति के तौलिये, रुमाल अथवा अन्य निजी सामान का उपयोग नहीं करने, आंखों को साफ पानी से धोने, आवश्यकता होने पर काला चश्मा लगाने तथा संक्रमण होने पर बच्चों को स्कूल नहीं भेजकर चिकित्सक से परामर्श लेने की सलाह भी स्वास्थ्य विभाग ने दी है।







