आर्लिंगटन (टेक्सास): पेड्रो पोरो के दूसरे हाफ में किये गये अहम गोल की बदौलत स्पेन ने मंगलवार को स्टार खिलाड़ियों वाली फ्रांस को 2-0 से हराकर फीफा विश्व कप फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली। एटीएंडटी स्टेडियम में खेले गये पहले सेमीफाइनल में स्पेनिश राइट-बैक पूरे मैच में छाए रहे। उन्होंने डिफेंस में मजबूती और अटैक में आक्रामकता का बेहतरीन तालमेल बिठाया और ‘ला रोजा’ (स्पेनिश टीम) को खिताबी मुकाबले तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। कप्तान मिकेल ओयारजाबल के पेनल्टी स्पॉट से शुरुआती बढ़त दिलाने के बाद, पोरो के 58वें मिनट के गोल ने जीत लगभग पक्की कर दी।
स्पेन ने शुरुआत से ही गेम पर अपना नियंत्रण बनाए रखा और 22वें मिनट में उन्हें इसका फायदा मिला। फ्रांस द्वारा स्पॉट-किक दिए जाने के बाद ओयारजाबल ने शांति से पेनल्टी को गोल में बदला। इस गोल ने लुइस डे ला फुएंते की टीम का आत्मविश्वास बढ़ाया और उन्होंने अपने शानदार पासिंग और अनुशासित प्रेसिंग के दम पर खेल की गति को नियंत्रित करना जारी रखा। ओयारजाबल ने गोल की शुरुआत की, लेकिन पोरो ने स्पेन के दबदबे को बखूबी दिखाया। टोटेनहम हॉटस्पर के डिफेंडर बार-बार राइट फ्लैंक से आगे बढ़े, अटैक के लिए जगह बनाई और साथ ही फ्रांस के खतरनाक फॉरवर्ड्स के खिलाफ डिफेंस में भी मजबूती बनाए रखी। उनके खेल का निर्णायक पल दूसरे हाफ के 13वें मिनट में आया। दानी ओल्मो ने आगे बढ़ रहे पोरो को एक सटीक पास दिया। पोरो ने अपनी दौड़ का सही समय चुना और शांति से गोलकीपर माइक मैगनन को छकाते हुए गोल कर दिया, जिससे स्पेन की बढ़त दोगुनी हो गई और फ्रांस के लिए वापसी करना मुश्किल हो गया।
इस गोल का ऐतिहासिक महत्व भी था; पोरो फर्नांडो हिएरो के बाद एक ही फीफा विश्व कप में कई गोल करने वाले दूसरे स्पेनिश डिफेंडर बन गए। काइलियन एमबापे, उस्मान डेम्बेले और माइकल ओलिस जैसे स्टार अटैकर्स के बावजूद फ्रांस की टीम स्पेन के संगठित डिफेंस को भेदने में संघर्ष करती दिखी। एमबापे ने कुछ अच्छे पल दिखाए लेकिन अनुशासित स्पेनिश रक्षापंक्ति के सामने उन्हें ज्यादा जगह नहीं मिली, जबकि डेम्बेले पूरे मैच के दौरान लगभग शांत ही रहे।
डिडिएर डेसचैम्प्स ने दूसरे हाफ के बीच में थियो हर्नांडेज, रेयान चेर्की और डेसिरे डौए को मैदान पर उतारकर मैच का रुख बदलने की कोशिश की। इन बदलावों से फ्रांस के अटैक में थोड़ी तेजी तो आई, लेकिन स्पेन ने संयम बनाए रखा और खेल पर अपना नियंत्रण जारी रखा। फ्रांस को सबसे अच्छा मौका तब मिला जब एम्बाप्पे ने पेनल्टी एरिया के अंदर शॉट के लिए जगह बनाई, लेकिन मार्क कुकुरेला ने उसे शानदार तरीके से रोक दिया। कुछ ही देर बाद, कॉर्नर पर ऑरेलियन चौमेनी का हेडर गोलपोस्ट के ऊपर से निकल गया, जबकि फ्रांसीसी टीम किसी तरह मैच में वापसी की कोशिश कर रही थी।
वहीं, स्पेन ने मैच के आखिरी पलों में समझदारी से खेल दिखाया। टीम की लय बनाए रखने के लिए फेरान टोरेस, पेड्री, मार्कोस लोरेंटे, मिकेल मेरिनो और निको विलियम्स को मैदान पर उतारा गया; विलियम्स ने स्टॉपेज टाइम में पेनल्टी एरिया में घुसकर तीसरा गोल करने की कोशिश भी की, लेकिन गेंद साइड-नेटिंग से टकरा गई। गोलकीपर उनाई साइमन ने भी देर से हुई एक गलती से उबरते हुए डेसिरे डौए को गोल करने से रोका; वे अपनी लाइन से आगे निकल आए थे, लेकिन फिर भी स्पेन ने ‘क्लीन शीट’ (बिना गोल खाए मैच खत्म करना) बनाए रखी।
एमबापे की निराशा फ्रांस की उस निराशाजनक शाम को बयां कर रही थी। कप्तान को 86वें मिनट में देर से किए गए चैलेंज के लिए कार्ड दिखाया गया और कुछ ही देर बाद उन्होंने फ्री-किक को क्रॉसबार के ऊपर से मार दिया। यह 2018 के विश्व चैंपियन फ्रांस के लिए एक ऐसी रात थी जिसे वे भूलना चाहेंगे। आखिरी सिटी बजी और स्पेन ने खिताबी मुकाबले में प्रवेश कर लिया।







