हरिद्वार: पतंजलि अनुसंधान संस्थान (पीआरएफ), पतंजलि विश्वविद्यालय और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश के बीच गुरुवार को क्लिनिकल रिसर्च, वैज्ञानिक अनुसंधान और स्वास्थ्य विज्ञान में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किये गये।
समझौते के तहत तीनों संस्थान क्लिनिकल अध्ययन और वैज्ञानिक अनुसंधान में सहयोग के साथ तकनीकी विशेषज्ञता साझा करेंगे। विद्यार्थियों, शोधार्थियों, चिकित्सकों और वैज्ञानिकों के लिए प्रशिक्षण तथा आदान-प्रदान कार्यक्रम भी आयोजित किये जाएंगे। इसका उद्देश्य आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के समन्वय से रोगियों के लिए साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य समाधान विकसित करना है।
पतंजलि के आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि संयुक्त क्लिनिकल अनुसंधान और वैज्ञानिक प्रमाणों के माध्यम से जनस्वास्थ्य के लिए अधिक प्रभावी एवं विश्वसनीय समाधान विकसित किये जा सकेंगे। एम्स ऋषिकेश की निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. मीनू सिंह ने कहा कि आधुनिक चिकित्सा और पारंपरिक ज्ञान के बीच वैज्ञानिक संवाद वर्तमान समय की आवश्यकता है। यह समझौता क्लिनिकल रिसर्च, नवाचार और शिक्षा के क्षेत्र में नए अवसर प्रदान करेगा। पतंजलि विश्वविद्यालय के उप कुलपति प्रो. मयंक कुमार अग्रवाल ने बताया कि समझौते के तहत दोनों संस्थान आवश्यकतानुसार वैज्ञानिक एवं तकनीकी विशेषज्ञता साझा करेंगे।
एम्स ऋषिकेश के डीन (रिसर्च) प्रो. शैलेन्द्र हांडू ने कहा कि सहयोग के जरिये आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा की संयुक्त क्षमताओं का उपयोग कर वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित समाधान विकसित किये जाएंगे। पतंजलि अनुसंधान संस्थान के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. अनुराग वार्ष्णेय ने कहा कि यह समझौता संयुक्त अनुसंधान के अलावा क्लिनिकल अध्ययन, डेटा आधारित अनुसंधान और युवा शोधकर्ताओं के प्रशिक्षण के लिए भी मंच प्रदान करेगा।







