Home राष्ट्रीय परिसीमन बिल पर बनर्जी का हमला, महिला आरक्षण पर भी सवाल

परिसीमन बिल पर बनर्जी का हमला, महिला आरक्षण पर भी सवाल

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Banerjee attacks delimitation bill, questions women's reservation too

कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा में परिसीमन बिल के गिरने पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि इस हार ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की बेचैनी को सबके सामने उजागर कर दिया है। उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार को महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने के लिए तुरंत कदम उठाने चाहिए। शुक्रवार को लोकसभा में एक संविधान संशोधन बिल पेश किया गया था। इस बिल का मुख्य उद्देश्य साल 2029 से विधानसभाओं और संसद में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करना था। साथ ही, इसमें लोकसभा सीटों की संख्या को बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव भी शामिल था। हालांकि, यह बिल सदन में गिर गया।

वोटिंग के दौरान बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि 230 सांसदों ने इसके विरोध में वोट दिया। सदन में मौजूद कुल 528 सदस्यों में से बिल को पास कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी 352 वोटों की जरूरत थी, जिसे सरकार हासिल नहीं कर सकी। अभिषेक बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि परिसीमन बिल की हार से भाजपा की घबराहट साफ दिख रही है। उन्होंने कहा कि विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन ने इस बिल को इसलिए खारिज किया क्योंकि इसमें निष्पक्षता और संतुलन को लेकर गंभीर चिंताएं थीं। सरकार 2011 की जनगणना के आधार पर लोकसभा सीटों को बढ़ाकर 850 करने की कोशिश कर रही थी, जो सही नहीं था। टीएमसी सांसद ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि एनडीए सरकार अब बहुत कम समय के लिए बची है।

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उन्होंने कहा कि सत्ता पर सरकार की पकड़ अब धीरे-धीरे कमजोर पड़ रही है। महिलाओं के आरक्षण के मुद्दे पर बनर्जी ने जोर देकर कहा कि 33 प्रतिशत कोटा देने वाला कानून सितंबर 2023 में ही सर्वसम्मति से पास हो चुका है। यह कानून 16 अप्रैल 2026 से प्रभावी भी है। उन्होंने कहा कि अगर एनडीए सरकार वाकई गंभीर है, तो उसे तुरंत सीटों को अधिसूचित करने के लिए बिल लाना चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि टीएमसी ने पहले ही संसद में महिलाओं को 41 प्रतिशत से ज्यादा प्रतिनिधित्व देकर मिसाल पेश की है। विपक्षी दलों का कहना है कि वे महिला आरक्षण का समर्थन करने के लिए तैयार हैं, लेकिन इसे विवादित परिसीमन प्रक्रिया से अलग रखा जाना चाहिए। इस बिल में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव था ताकि महिलाओं को आरक्षण दिया जा सके।