Questions raised on PIL, VIP movement and crowd control in Supreme Court on Mahakumbh incident

प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ में मौनी अमावस्या के अमृत स्नान के दौरान हुए दर्दनाक हादसे के बाद सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है. याचिकाकर्ता ने अदालत से उत्तर प्रदेश सरकार से मामले की स्थिति रिपोर्ट मांगने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के निर्देश देने की अपील की है.

वीआईपी मूवमेंट को लेकर चिंता

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याचिका में विशेष रूप से वीआईपी मूवमेंट के कारण आम श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभाव को उठाया गया है. याचिकाकर्ता ने मांग की है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उचित नीति और नियमन लागू किए जाएं, जिससे हादसों को रोका जा सके। साथ ही, महाकुंभ में श्रद्धालुओं के प्रवेश और निकास के लिए अधिकतम स्थान उपलब्ध कराने की भी सिफारिश की गई है.

जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग

याचिका में यह भी आग्रह किया गया है कि 29 जनवरी को हुए इस हादसे की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए और जिन व्यक्तियों या अधिकारियों की लापरवाही सामने आए, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए.

जांच के लिए न्यायिक आयोग का गठन

इससे पहले, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस हादसे की जांच के लिए तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग के गठन का आदेश दिया था. साथ ही, मृतकों के परिजनों को 25-25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई. घटना की जानकारी साझा करते हुए मुख्यमंत्री भावुक भी हो गए थे.

सख्त भीड़ प्रबंधन के प्रयास

हादसे के बाद प्रशासन ने मेले में जाने वाले वाहनों पर रोक लगा दी और जिले की सीमाओं को सील कर यातायात नियंत्रण की कड़ी व्यवस्थाएं कीं. पुलिस ने आपातकालीन योजनाएं लागू कर भीड़ को संगम तक व्यवस्थित रूप से पहुंचाने के इंतजाम किए. मेले के दौरान भीड़ नियंत्रण के लिए कुल 32 योजनाएं बनाई गई थीं, जिनमें रेलवे स्टेशन, बस अड्डे और शहर के विभिन्न प्रवेश मार्गों पर विशेष निगरानी रखी गई.

यह याचिका सुप्रीम कोर्ट से महाकुंभ जैसे भव्य आयोजनों में सुरक्षा उपायों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश देने की मांग कर रही है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके.