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गहरी नींद में मौ/त: 9 लोगों की जान गई, आखिरी में दो शव बरामद

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Death in deep sleep: 9 people lost their lives, two bodies recovered at last

दिल्ली:नई दिल्ली के पालम इलाके के साध नगर में बुधवार सुबह हुआ भीषण अग्निकांड एक ही परिवार के लिए विनाशकारी साबित हुआ। सुबह का समय होने के कारण परिवार के अधिकांश सदस्य गहरी नींद में थे, जिससे आग लगने का उन्हें समय पर पता ही नहीं चल सका। जब तक लोगों की नींद धुएं और घुटन के कारण टूटी, तब तक हालात बेकाबू हो चुके थे और पूरी इमारत आग की चपेट में आ चुकी थी।

आग इतनी तेजी से फैली कि परिवार के लोगों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला। जान बचाने की आखिरी कोशिश में इमारत के मालिक राजेंद्र कश्यप के बेटे सचिन और अनिल ने डेढ़ साल की बच्ची मिताली को लेकर तीसरी मंजिल से छलांग लगा दी। इन तीनों ने किसी तरह अपनी जान बचाई, लेकिन बाकी लोग आग और धुएं के बीच फंस गए। इस दर्दनाक हादसे में कुल नौ लोगों की मौत हो गई, जिनमें 70 वर्षीय लाडो देवी, उनके बेटे, बहुएं और तीन मासूम पोतियां शामिल हैं। कई शव इतनी बुरी तरह झुलस चुके थे कि उनकी पहचान करना मुश्किल हो गया।

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घटना के समय राजेंद्र कश्यप घर पर मौजूद नहीं थे। वह गोवा गए हुए थे, जबकि परिवार के कुछ अन्य सदस्य भी बाहर थे। इस वजह से 19 सदस्यों वाले परिवार में अब केवल 10 लोग ही बचे हैं, जिनमें से तीन अस्पताल में भर्ती हैं। हादसे ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।

दमकल विभाग को आग बुझाने और राहत कार्य में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इमारत का डिजाइन ऐसा था कि ग्राउंड फ्लोर से दूसरी मंजिल तक सामने की ओर पूरी तरह शीशा लगा हुआ था, जिससे वेंटिलेशन की कोई व्यवस्था नहीं थी। इसी कारण धुआं तेजी से अंदर भर गया और लोगों का दम घुटने लगा। आग तक पानी पहुंचाने के लिए दमकल कर्मियों को क्रेन की मदद से शीशे तोड़ने पड़े, जिसके बाद ही आग पर काबू पाया जा सका।

स्थानीय लोगों ने भी बचाव कार्य में मदद करने की कोशिश की, लेकिन घने धुएं के कारण अंदर जाना संभव नहीं था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, इलाके में बिजली के तार बेहद खतरनाक स्थिति में हैं और अक्सर स्पार्किंग होती रहती है, जिससे आग लगने का खतरा बना रहता है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, आग पहली मंजिल पर लगी थी और देखते ही देखते पूरे भवन में फैल गई।

इस हादसे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी के नेताओं ने इसे प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम बताया है और दमकल विभाग की तैयारियों पर सवाल उठाए हैं। आरोप लगाया गया है कि समय पर उचित उपकरण और संसाधन उपलब्ध होते तो कुछ लोगों की जान बचाई जा सकती थी।

फिलहाल पुलिस और संबंधित एजेंसियां आग लगने के कारणों की जांच में जुटी हैं। यह हादसा एक बार फिर महानगरों में अवैध निर्माण, खराब विद्युत व्यवस्था और अग्नि सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गंभीर समस्या को उजागर करता है।