नयी दिल्ली:पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध का असर अब भारत के दवा बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। कच्चे माल की कीमतों में तेजी के कारण बुखार और पेनकिलर से लेकर सर्जिकल सामान तक महंगे होने की आशंका जताई जा रही है।
कारोबारियों के अनुसार, दवा और सर्जिकल आइटम के रेट में 20 से 25 प्रतिशत की तेजी आ सकती है। जिसको लेकर दवा बाजार में हलचल है।दवाओं के मैन्युफैक्चरर और एक्सपोर्टर लक्ष्य खन्ना बताते हैं कि दवा निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कई जरूरी कच्चे माल, जैसे केमिकल कंपोनेंट्स, प्लास्टिक और एल्युमीनियम की कीमतों में हाल के दिनों में बढ़ोतरी हुई है। इनका सीधा असर दवा कंपनियों की लागत पर पड़ रहा है।दरअसल, टैबलेट और सिरप के निर्माण के साथ-साथ उनकी पैकेजिंग में भी प्लास्टिक और एल्युमीनियम का बड़ा उपयोग होता है। कीमतें बढ़ने से कंपनियों की उत्पादन लागत बढ़ रही है, जिसका असर अब दवा की कीमतों पर दिखने लगा है।
- लक्ष्य ने एक रिपोर्ट साझा करते हुए बताया कि आम इस्तेमाल की दवाओं में शामिल पैरासिटामोल के कच्चे माल की कीमत भी करीब 47% तक बढ़ गई है। दर्द निवारक डाईक्लोफेनाक में 54% और डाईक्लोफेनाक पोटेशियम में 33% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं, एंटीबायोटिक्स भी इससे बचे नहीं हैं।
- अमॉक्सिसिलिन ट्राइहाइड्रेट की कीमत में 45% और सिप्रोफ्लोक्सासिन करीब 62% तक का इजाफा हुआ है। वहीं, दवा कारोबारी आशीष ग्रोवर ने बताया कि दवा के साथ ही सर्जिकल आइटम में भी 20 से 25 प्रतिशत की वृद्धि होने के आसार हैं।
दवा कारोबारी आशीष ग्रोवर बताते है कि दवा से लेकर सर्जिकल आइटम के दामों में तेजी आने वाली है। क्योंकि, कच्चे माल से लेकर दवाओं की पैकिग का खर्च बढ़ गया है। नतीजतन, नए खेप की दवाओं में इसका असर देखने को मिल सकता है। आशीष ने बताया कि इसी बीच कुछ ऐसे कारोबारी है जिन्होंने दवा से लेकर सर्जिकल आइटम आइटम के रेट बढ़ा दिए है। ऐसा बिल्कुल नहीं होना चाहिए। पुरानी खेप की दवाएं और सर्जिकल आइटम की कीमत पहले वाली ही होगी।







