नयी दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर अब भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर भी पड़ने लगा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह तनाव लंबे समय तक जारी रहता है, तो कच्चे तेल से ज्यादा बड़ा संकट लिक्विफाइड नैचुरल गैस (LNG) की आपूर्ति को लेकर पैदा हो सकता है। श्रीराम एसेट मैनेजमेंट की एक रिपोर्ट में इस खतरे को लेकर गंभीर चेतावनी दी गई है।
रिपोर्ट के अनुसार भारत की गैस आपूर्ति काफी हद तक होर्मुज स्ट्रेट पर निर्भर है। देश के कुल एलएनजी आयात का लगभग 55 से 65 प्रतिशत हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर आता है। वहीं, भारत की करीब 40 प्रतिशत गैस आपूर्ति अकेले कतर से होती है। ऐसे में अगर इस क्षेत्र में लंबे समय तक तनाव या अवरोध बना रहता है, तो भारत की गैस सप्लाई पर तत्काल और बड़ा असर पड़ सकता है।
हाल ही में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर हमलों के बाद खाड़ी क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। इसके जवाब में ईरान की ओर से भी जवाबी कार्रवाई की गई, जिसके बाद होर्मुज स्ट्रेट में नौसैनिक बारूदी सुरंगें बिछाने की खबरें सामने आईं। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा ट्रांजिट रूट्स में से एक है और रोजाना लगभग 150 तेल व गैस टैंकर यहां से गुजरते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल की आपूर्ति को रूस या अन्य देशों से कुछ हद तक बदला जा सकता है, लेकिन एलएनजी के मामले में विकल्प सीमित हैं। वैश्विक स्पॉट मार्केट में गैस की उपलब्धता कम है और अमेरिका, अफ्रीका या ऑस्ट्रेलिया से आने वाले जहाजों को भारत तक पहुंचने में अधिक समय और लागत लगती है।
भारत के घरेलू बाजार में इसके शुरुआती संकेत भी दिखने लगे हैं। कई उद्योगों को गैस की कमी का सामना करना पड़ रहा है और उपलब्ध आपूर्ति को अब घरेलू उपभोक्ताओं, अस्पतालों और उर्वरक उत्पादन जैसे जरूरी क्षेत्रों को प्राथमिकता देकर भेजा जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो उद्योगों और अर्थव्यवस्था पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है।







