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मुश्किल वक्त में भारत का साथ, ऊर्जा संकट के बीच बांग्लादेश को डीजल आपूर्ति

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India supports Bangladesh in difficult times, supplies diesel to Bangladesh amid energy crisis

नयी दिल्ली: पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण तेल की आपूर्ति बुरी रह से बाधित हुई है। तेल संपन्न खाड़ी देशों को दुनिया के अन्य भागों से जोड़ने वाले रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल टैंकरों और वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही पर ईरान ने रोक लगा दी है। इस रास्ते से 20 फीसदी तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की ढुलाई होती है। इसके चलते नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका और मालदीव जैसे पड़ोसी देशों में ईंधन की भारी किल्लत हो गई है। भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा तेल रिफाइनर है, उसके पास भंडारण की भी पर्याप्त सुविधा है, इसको देखते हुए पड़ोसी देशों ने भारत से आपातकालीन ईंधन की आपूर्ति की मांग की है। नेपाल ने इंडिय ऑयल कॉर्पोरेशन से मौजूदा संकट के मद्देनजर एलपीजी की मासिक आपूर्ति बढ़ाने का अनुरोध किया है।

नेपाल ने 3,000 टन अतिरिक्त एलपीजी की मांग की थी, लेकिन भारत फिलहाल अनुबंधित मात्रा की आपूर्ति करने की ही बात कही है। समझौते के तहत आईओसी प्रति माह नेपाल को लगभग 48,000 टन एलपीजी की आपूर्ति करता है। नेपाल भारत पर निर्भर है। नेपाल में सामान्य एलपीजी सिलेंडर 14.2 किलोग्राम का होता है, लेकिन संकट के कारण इसे घटाकर 7.1 किलोग्राम करने का निर्णय किया गया है। संकट की इस घड़ी में ऊर्जा के लिए श्रीलंका ने भी भारत से अनुरोध किया है। वह अन्य विकल्पों को भी तलाश रहा है। अमेरिका की ओर से रूसी तेल पर लगे प्रतिबंधों पर अस्थायी छूट के तहत तेल खरीद पर विचार कर रहा है। श्रीलंका के विदेश मंत्री ने इस संबंध में कोलंबो में रूस के राजदूत के साथ बैठक भी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, श्रीलंका ने पिछले साल ईंधन आयात पर 3.83 अरब डॉलर खर्च किए, जिनमें से अधिकांश खेप भारत और सिंगापुर से आई।

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श्रीलंका के पास कुछ हफ्तों का ईंधन बचा है और उसके पास भंडारण के लिए भी पर्याप्त सुविधाएं नहीं है। ऐसे में उम्मीद है कि भारत उसकी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करेगा, जैसा कि वह पहले भी करता रहा है। वैसे तो भारत और बांग्लादेश के बीच डीजल निर्यात को लेकर पहले से ही समझौता है। इसके तहत बांग्लादेश हर साल भारत से 1,80,000 टन डीजल प्राप्त करता है। संकट के बावजूद भारत ने पड़ोसी प्रथम का उदाहरण देते हुए पिछले दिनों 5,000 टन डीजल का निर्यात किया था। बांग्लादेश अपनी 80 फीसदी ऊर्जा पश्चिण एशिया के देशों से आयात करता है, संघर्ष के कारण पैदा हुए संकट में उसने भारत से समझौते में तय मात्रा से अधिक डीजल देने का अनुरोध किया है। बांग्लादेश के ऊर्जा मंत्री इकबाल हसन महमूद ने दो दिन पहले ही ढाका में भारतीय उच्चायुक्त से मुलाकात की थी और उनसे तेल की आपूर्ति में थोड़ी वृद्धि करने का अनुरोध किया था।





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