कोलकाता: पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस ने सोमवार को आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के प्री-पोल परामर्श बैठक में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे पर उनकी चिंताओं को सुना ही नहीं गया। बंगाल की वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने बैठक के बाद पत्रकारों से कहा कि पार्टी की तीन सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल को बताया गया कि चूंकि इस मुद्दे पर टीएमसी सुप्रीम कोर्ट गई है, इसलिए यह वहां तय होगा और चुनाव आयोग का इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं है।
बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू, विवेक जोशी और पश्चिम बंगाल के सीईओ मनोज अग्रवाल ने विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से न्यू टाउन, कोलकाता के एक होटल में चर्चा की। भट्टाचार्य ने कहा “मैं महिला हूं और मुझसे कहा गया ‘चिल्लाओ मत’। जब हम लोगों के अधिकारों की बात कर रहे हैं, तो हमें क्यों नहीं अपनी आवाज उठाने दी जा रही?” उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने बार-बार सुप्रीम कोर्ट में मामला होने का हवाला दिया। भट्टाचार्य ने सवाल उठाया अगर मामला सुप्रीम कोर्ट में है, तो हमें बैठक में बुलाने का क्या मतलब था? बुलाया है तो हमारी बातें क्यों नहीं सुनी जा रही हैं? कोलकाता के मेयर फिरहाद हाकिम ने कहा कि बंगाल में घुसपैठियों की झूठी छवि बनाई जा रही है, जिससे असली भारतीय नागरिकों को परेशान किया जा रहा है।
उन्होंने दावा किया कि पिछले दो महीनों में कोई भी घुसपैठिया या रोहिंग्या नहीं पकड़ा गया, लेकिन सामान्य नागरिकों को लंबी कतारों में खड़ा किया जा रहा है, कई लोग बीमार पड़ गए और कुछ की मृत्यु हो गई। हाकिम ने कहा कि मतदान का अधिकार संवैधानिक अधिकार है और असली नागरिकों के नाम मतदाता सूची से हटाना असंवैधानिक होगा। भट्टाचार्य और हाकिम ने कहा कि चुनाव आयोग से कितने चरणों में चुनाव कराने की मांग है, यह महत्वपूर्ण नहीं है। सबसे अहम यह है कि असली वोटर BJP के प्रभाव में आकर सूची से न हटें। टीएमसी प्रतिनिधि मंडल में पूर्व डीजीपी और राज्यसभा उम्मीदवार राजीव कुमार भी शामिल थे।







