जम्मू कश्मीर: जम्मू-कश्मीर की राजनीति के वरिष्ठ और अनुभवी नेता Ghulam Nabi Azad का नाम भारतीय राजनीति में लंबे समय से सम्मान के साथ लिया जाता है। अपने दशकों लंबे राजनीतिक करियर में उन्होंने राज्य और केंद्र दोनों स्तरों पर कई अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं। उनके जन्मदिन के अवसर पर उनके राजनीतिक सफर को याद किया जा रहा है, जो छात्र राजनीति से शुरू होकर राष्ट्रीय राजनीति तक पहुंचा।
गुलाम नबी आजाद का जन्म 7 मार्च 1949 को जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में हुआ था। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत छात्र राजनीति से की और जल्द ही राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना ली। वे लंबे समय तक Indian National Congress से जुड़े रहे और पार्टी में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया।
आजाद को केंद्र सरकार में भी कई अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी मिली। वे भारत सरकार में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री के रूप में भी काम कर चुके हैं, जहां उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण योजनाओं और सुधारों को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई।
साल 2005 में उन्हें जम्मू-कश्मीर का मुख्यमंत्री बनाया गया। मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान राज्य में विकास परियोजनाओं और प्रशासनिक सुधारों पर विशेष जोर दिया गया। हालांकि, राजनीतिक परिस्थितियों के कारण उनका कार्यकाल ज्यादा लंबा नहीं चल पाया, लेकिन उनकी प्रशासनिक क्षमता की व्यापक सराहना हुई।
गुलाम नबी आजाद संसद के उच्च सदन यानी Rajya Sabha के पांच बार सदस्य रह चुके हैं। इस दौरान उन्होंने संसद में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखी और विपक्ष तथा सरकार दोनों के बीच संतुलित और संयमित राजनीति के लिए जाने गए।
कांग्रेस से लंबे समय तक जुड़े रहने के बाद उन्होंने अपनी अलग राजनीतिक पार्टी भी बनाई और जम्मू-कश्मीर की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते रहे। आज भी उन्हें देश के अनुभवी और संतुलित नेताओं में गिना जाता है, जिनकी राजनीतिक यात्रा कई पीढ़ियों के लिए प्रेरणा मानी जाती है।







