पटना: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब बिहार की राजनीति छोड़कर केंद्र की राजनीति में सक्रिय होने जा रहे हैं। चुनाव के नतीजे आने के तीन महीने बाद उन्होंने यह बड़ा फैसला लिया, जिसने प्रदेश में चर्चा का नया विषय बना दिया है। बिहार में महिलाओं को नीतीश कुमार का कोर वोटर माना जाता है, इसलिए उनके राज्यसभा जाने की खबर पर महिलाओं ने मिलाजुला प्रतिक्रिया दी है।
पटना की महिलाओं से बातचीत में कुछ ने कहा कि नीतीश कुमार ने बिहार को “एक बिहारी सब पर भारी” बनाने का काम किया है, जबकि कुछ ने कहा कि उन्होंने बिहार को अपने घर की तरह सजाया है। कई महिलाओं ने यह भी कहा कि अगर उन्हें पहले पता होता कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद छोड़ देंगे, तो वे उनके नाम पर वोट नहीं देतीं।
स्थानीय निवासी चांदनी गुप्ता ने बताया कि उन्हें नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद छोड़ने की खबर उनके दोस्तों के स्टेटस से पता चली। चांदनी ने कहा कि 2005 में बिहार में महिलाओं के लिए कई प्रतिबंध थे, लेकिन नीतीश कुमार के शासन में महिलाओं के लिए सुरक्षा और स्वतंत्रता बढ़ी। उनका कहना था कि “नीतीश कुमार ने महिला सशक्तिकरण के लिए बहुत काम किया, और यह काम शायद ही कोई और नेता कर पाए।”
मुंबई से बिहार आई तृषा ने कहा कि नीतीश कुमार के फैसले से उन्हें काफी दुख हुआ, क्योंकि उन्होंने महिलाओं के लिए साइकिल योजना, स्नातक के बाद आर्थिक सहायता और नौकरी में आरक्षण जैसी कई योजनाएं लागू कीं। उन्होंने बताया कि अब महिलाओं के लिए रात में घर से निकलना सुरक्षित है और उनके प्रयासों से बिहार में महिला सुरक्षा में सुधार आया है।
श्वेता ने भी कहा कि उन्होंने बचपन से लेकर अब तक नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री के रूप में देखा है और उनके कार्यों को देखकर ही उन्होंने उन्हें वोट दिया। महिलाओं का मानना है कि अब किसी भी नए मुख्यमंत्री में नीतीश कुमार जैसा महिला केंद्रित दृष्टिकोण नहीं मिलेगा।
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले ने महिलाओं के दिलों में भावुकता और चिंता दोनों ही पैदा कर दी है। उनकी योजनाओं और सुरक्षा उपायों को याद करते हुए महिलाएं उन्हें याद रखेंगी, जबकि नए राजनीतिक दौर की उम्मीदों और सवालों के बीच बिहार आगे बढ़ रहा है।







