पटना। बिहार विधानसभा में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के विधायक दल के नेता अख्तरुल ईमान ने धर्मांतरण की समीक्षा और नए कानून बनाने का विरोध करते हुए कहा कि प्राचीन धार्मिक गुरुओं ने धर्म के संचालन से संबंधित नियम और कानून बना रखे हैं और उसमें राजनीतिक हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नही है। श्री ईमान ने आज यहां यूनीवार्ता से कहा कि सभी धर्मों के प्रवर्तक बहुत ज्ञानी महापुरुष थे। उन्होंने धर्म के संचालन और आचार की व्याख्या कर रखी है। उन्होंने कहा कि धर्म से संबंधित फैसले राजनेताओं के बदले धर्मगुरु लें तो अच्छा है।
एआईएमआईएम के विधायक दल के नेता ने कहा कि किसी भी धर्म से धर्मांतरण राजनीतिक फैसलों से नही रुकेगा। उन्होंने कहा कि कोई भी धर्म अपनी धार्मिक व्यवस्था और आचार विचार की मजबूती से आगे बढ़ता है और उस पर ध्यान दिया जाए तो उसे मानने वाले छोड़ कर कहीं नही जाएंगे। श्री ईमान ने कहा कि यह कहना गलत है कि लोग लोभ और लालच से अपना धर्म परिवर्तन कर लेते हैं। उन्होंने कहा कि व्यक्ति की जिंदगी पर उसके धर्म का गहरा असर होता है और इंसान भले भूखा मर जायेगा, लेकिन लोभ और लालच में अपना धर्म नही छोड़ेगा। उन्होंने कहा कि अपना धर्म छोड़ के दूसरे धर्म मे जाने वाले मूलतः वैसे लोग होते हैं ,जो अपने धर्म मे निराश हो जाते हैं।
एआईएमआईएम के नेता ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी लोगों को गुमराह करने के लिए ‘प्रोपेगैंडा’ करती है। उन्होंने कहा कि ‘यूनिफॉर्म सिविल कोड’ की बात कह कर मुसलमानों को डराया जाता है। उन्होंने कहा कि भाजपा पहले देश के सभी राज्यों में हिंदू भाइयों को इस कोड के लिए राजी कर ले, उसके बाद मुसलमानों से बातचीत की बारी आएगी। श्री ईमान ने बिहार में मुस्लिम मतों के बंटवारे पर कहा कि वह आज भी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के साथ सहयोग के लिए तैयार हैं, बशर्ते उनकी कुछ बातें मान ली जाए। उल्लेखनीय है कि 27 फरवरी को बिहार विधानसभा के अध्यक्ष प्रेम कुमार ने सदन में सरकार को निर्देश दिए थे कि वह प्रदेश के विभिन्न इलाकों में चल रहे धर्मांतरण की समीक्षा कर, यदि आवश्यक हो तो इस समस्या के निदान के लिए जरूरी कानून बनाये।







