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बच्चा चोर के अफवाह पर हो रही निर्दोषों की पिटाई

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बच्चा चोर के अफवाह पर हो रही निर्दोषों की पिटाई

रोहतास। बिहार में इन दिनों “बच्चा चोर” की अफवाहों को लेकर कई जिलों में द केीतनावपूर्ण स्थिति देखने को मिल रही है। सोशल मीडिया पर फैल रही अपुष्ट सूचनाओं और भ्रामक वीडियो के कारण आम लोगों में डर का माहौल बन गया है, जिसका नतीजा कई जगहों पर संदिग्ध समझकर निर्दोष लोगों की पिटाई और भीड़ हिंसा के रूप में सामने आया है। प्रशासन ने इसे गंभीरता से लेते हुए लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को देने की अपील की है। कुछ ऐसा ही मामला रोहतास जिला से आया है जब बच्चा चोर के अफवाह पर एक फेरी वाले निर्दोष की पिटाई कर दी गई। हालांकि सूचना पर तुरंत स्थानीय पुलिस पहुंच गई और उस व्यक्ति अपने साथ ले गई। कुछ जांच पड़ताल के बाद मालूम चला कि वह व्यक्ति निर्दोष था। अगर पुलिस समय पर नहीं पहुंचती तो बच्चा चोर के गलत अफवाह पर एक निर्दोष व्यक्ति मॉब लांचिंग का शिकार हो गया होता। घटना के बाद वरीय पुलिस अधिकारी ने वीडियो जारी कर इसकी जानकारी दी और ऐसे अफवाहों से बचने की भी सलाह दीं

हालांकि बिहार पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों को अलर्ट जारी करते हुए गश्त बढ़ाने, चौक-चौराहों पर माइकिंग कराने और पंचायत स्तर तक जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अब तक बच्चा चोरी की संगठित घटना की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन अफवाहों के कारण कानून-व्यवस्था प्रभावित हो रही है। कई जिलों में पुलिस ने अफवाह फैलाने वाले सोशल मीडिया अकाउंट्स की पहचान कर कार्रवाई भी शुरू कर दी है। विशेषज्ञों के अनुसार, व्हाट्सएप और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म पर पुराने या दूसरे राज्यों की घटनाओं के वीडियो को स्थानीय बताकर साझा किया जा रहा है, जिससे लोगों में भ्रम फैल रहा है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संदेश को बिना सत्यापन के आगे न बढ़ाएं। ग्रामीण इलाकों में आंगनबाड़ी सेविकाओं, शिक्षकों और जनप्रतिनिधियों के माध्यम से भी जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अफवाह फैलाना दंडनीय अपराध है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने आम जनता से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि सतर्क रहें, लेकिन कानून अपने हाथ में न लें। अफवाह से ज्यादा खतरनाक भीड़ का गुस्सा होता है, इसलिए जागरूकता ही सबसे बड़ा समाधान है। भारत में पहले भी ऐसी अफवाहों के कारण भीड़ हिंसा की घटनाएं हो चुकी हैं, जिससे सबक लेते हुए प्रशासन इस बार पहले से सतर्क नजर आ रहा है।

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