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राजस्थान विधानसभा में उच्च शिक्षा विभाग की अनुदान मांगें ध्वनिमत से पारित

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The Rajasthan Legislative Assembly passed the Higher Education Department's grant demands by voice vote.

जयपुर। राजस्थान की सोलहवीं विधानसभा के पंचम एवं बजट सत्र में उच्च शिक्षा विभाग की 25 अरब 92 करोड़ 58 लाख 88 हजार रूपए की अनुदान मांगें ध्वनिमत से पारित कर दी गई। इससे पहले उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेम चंद बैरवा ने अनुदान मांग पर हुई बहस का जवाब देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार उच्च शिक्षा विस्तार के लिए योजनाबद्ध कार्य कर रही हैं। दो वर्षों में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों से उच्च शिक्षा में हमारा प्रदेश अब उत्कृष्टता की ओर से अग्रसर है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार पं. दीन दयाल उपाध्याय और बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर के आदर्शों पर चलकर शिक्षा को अंतिम छोर तक पहुंचाने के लिए संकल्पबद्ध है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने दो वर्षों में 71 नए महाविद्यालय खोले हैं। साथ ही, 17 स्नातक स्तर महाविद्यालय को स्नातकोत्तर महाविद्यालय में क्रमोन्नत किया है जबकि विगत सरकार में सिर्फ 12 ही हुए थे। प्रदेश के 10 महाविद्यालयों का नाम भामाशाह और शहीदों के नाम से किया गया है। वर्तमान राज्य सरकार द्वारा दो वर्ष में 185 महाविद्यालयों के नए भवनों का निर्माण कराया है। उच्च शिक्षा को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में नए महाविद्यालय खोलने और क्रमोन्नत करने के लिए घोषणाएं की गई हैं।


डॉ. बैरवा ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में नकल माफियों के खिलाफ सख्त कार्रवाईयां की जा रही हैं। वित्त पोषित और निजी संस्थानों की अनियमितताओं को लेकर शिकायतें मिलीं, उन पर एसओजी और संभागीय आयुक्त के निर्देशन में टीमों का गठन कर प्रभावी कार्रवाई कर रहे हैं। चूरू की ओपीजेएस विश्वविद्यालय में अनियमितताएं सामने आने पर प्रशासक नियुक्त किया गया है। साथ ही 10 विश्वविद्यालयों में भी जांच चल रही है। उन्होंने बताया कि पूर्ववर्ती सरकार ने अपने प्रारंभिक दो वर्षों में 223 सहायक आचार्य नियुक्त किए थे जबकि वर्तमान सरकार द्वारा अभी तक एक हजार से अधिक सहायक आचार्य नियुक्त किए जा चुके हैं। साथ ही, एक अप्रेल, 2025 तक रिक्त हुए पदों के लिए राजस्थान लोक सेवा आयोग को अभ्यर्थना भेजी जा चुकी है। उन्होंने बताया कि फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्रों से सेवा में आने वालों की भी जांच की जा रही है। डॉ. बैरवा ने कहा कि उच्च शिक्षा को व्यावहारिक और कौशल युक्त बनाने के लिए कई नवाचार किए जा रहे हैं। हमारा लक्ष्य प्रदेश के युवाओं को कौशल शिक्षा देकर आत्मनिर्भर और रोजगारकर्ता के बजाय रोजगार प्रदाता बनाना है। उन्होंने बताया कि जयपुर के महाराजा और महारानी महाविद्यालय की जमीन पुनः उनके नाम कराने के लिए जिला कलेक्टर (राजस्व) द्वारा कार्यवाही की जा रही है। उन्होंने बताया कि राइजिंग राजस्थान में 23 हजार 580 करोड़ रूपए से अधिक के एमओयू किए गए, जिनमें से 324 करोड़ रूपए के एमओयू का क्रियान्वयन किया जा चुका है।

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